
रायबरेली में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दो दिवसीय दौरे ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। दौरे के दौरान दो तस्वीरें सामने आईं, जिनमें से एक ने टकराव की तस्वीर पेश की तो दूसरी ने मेल-मिलाप का संकेत दिया। राहुल गांधी जब रायबरेली पहुंचे तो योगी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह उनके खिलाफ सड़क पर उतर आए। समर्थकों के साथ उन्होंने राहुल के दौरे का जमकर विरोध किया। यह तल्खी अगले दिन भी जारी रही।
सड़क पर विरोध और बैठक में तकरार
दरअसल, दिशा की बैठक के दौरान राहुल गांधी ने यह कहते हुए चर्चा शुरू की कि वे अध्यक्ष हैं और सभी विषय उनसे पूछकर ही आगे बढ़ाए जाने चाहिए। इस पर मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने तीखे लहजे में जवाब दिया कि “जब लोकसभा में आप अध्यक्ष का कहना नहीं मानते, तो मैं भी यहां मानने को बाध्य नहीं हूं।” दोनों नेताओं के बीच की यह नोक-झोंक कैमरे में कैद हो गई और अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
विरोध के बीच सामने आई दूसरी तस्वीर
जहां एक ओर मंत्री जी ने राहुल गांधी का विरोध किया, वहीं दूसरी ओर उनकी ही तस्वीर ने सबको चौंका दिया। बैठक के बाद की एक तस्वीर में दिनेश प्रताप सिंह के बेटे पीयूष प्रताप सिंह राहुल गांधी से मुस्कुराकर हाथ मिलाते दिखाई दिए। तस्वीर के बैकग्राउंड में खुद दिनेश प्रताप सिंह भी मुस्कुराते हुए खड़े नज़र आए। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर आते ही चर्चाओं का केंद्र बन गई। विपक्ष पर हमलावर मंत्री के बेटे का यह आत्मीय मुलाकात वाला अंदाज़ लोगों को हैरान कर गया।
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राजनीति में अलग तस्वीर
राहुल गांधी ने भी पीयूष प्रताप सिंह से पूरे आत्मीय भाव के साथ हाथ मिलाया। देखने वालों को यह मुलाकात बिल्कुल साधारण लगी, जैसे दो जान-पहचान वाले सहजता से मिल रहे हों। यही कारण है कि अब रायबरेली की सियासत में सवाल उठ रहे हैं कि क्या राजनीति की जंग और व्यक्तिगत रिश्ते अलग-अलग रास्तों पर चलते हैं?
विशेषज्ञ मानते हैं कि राजनीति में विरोधियों के बीच सार्वजनिक तौर पर टकराव और निजी स्तर पर मेलजोल कोई नई बात नहीं है। लेकिन जिस तरह एक ही परिवार की दो तस्वीरें एक में विरोध और दूसरी में आत्मीयता सामने आईं, उसने इस दौरे को खास बना दिया है।
राहुल के दौरे से कार्यकर्ता उत्साहित
राहुल गांधी का यह दौरा कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने वाला रहा, वहीं भाजपा खेमे में भी हलचल मच गई। अब देखना यह है कि रायबरेली की इन दो तस्वीरों का असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर कितना पड़ता है।