संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी के कुछ कथित बयानों को लेकर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन का नोटिस सौंपा है। आरोप है कि राहुल गांधी ने बहस के दौरान नागरिकों के एक वर्ग के लिए असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया।
क्या होता है विशेषाधिकार हनन?
विशेषाधिकार हनन तब माना जाता है जब संसद या उसके सदस्यों के अधिकारों और विशेषाधिकारों का उल्लंघन हो। संविधान के अनुच्छेद 105(2) के तहत सांसदों को सदन में बोलने की विशेष छूट मिलती है, लेकिन उन्हें संसद के नियमों और मर्यादाओं का पालन करना भी आवश्यक होता है।
नोटिस मिलने के बाद क्या होती है प्रक्रिया?
सबसे पहले लोकसभा अध्यक्ष यह तय करते हैं कि शिकायत में प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। यदि मामला बनता है तो इसे विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाता है। समिति दोनों पक्षों को सुनने, साक्ष्यों की जांच करने और रिपोर्ट तैयार करने के बाद अपनी सिफारिश लोकसभा को भेजती है। अंतिम फैसला सदन की मंजूरी से होता है।
क्या-क्या हो सकती है कार्रवाई?
समिति मामले को बिना कार्रवाई के बंद करने, चेतावनी देने, माफी मांगने का निर्देश देने या कुछ समय के लिए निलंबन की सिफारिश कर सकती है। सबसे कठोर कार्रवाई सदन से निष्कासन (Expulsion) है, लेकिन इसके लिए लोकसभा में बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी होता है और यह बेहद दुर्लभ स्थिति मानी जाती है।
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क्या राहुल गांधी की सांसदी जा सकती है?
केवल विशेषाधिकार हनन का नोटिस मिलने से सांसद की सदस्यता समाप्त नहीं होती। संसदीय प्रक्रिया पूरी होने, समिति की रिपोर्ट आने और लोकसभा द्वारा कठोर कार्रवाई को मंजूरी मिलने के बाद ही ऐसी कोई स्थिति बन सकती है। इसलिए फिलहाल केवल नोटिस के आधार पर राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता जाने की संभावना नहीं मानी जा रही है।