ईरान युद्ध और बढ़ती वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से की गई अपील अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गई है। प्रधानमंत्री ने लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने, विदेश यात्राएं कम करने और पेट्रोल की खपत घटाने की अपील की थी। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सलाह नहीं बल्कि सरकार की नाकामी का संकेत है।
पीएम मोदी ने जनता से की थी बड़ी अपील
हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए लोगों को खर्च और संसाधनों के इस्तेमाल में सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने, पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने तथा विदेश यात्राओं को टालने की अपील की। इसके साथ ही कंपनियों से वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की बात भी कही।
कोरोना काल का उदाहरण देकर समझाई जरूरत
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कोरोना महामारी के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय लोगों ने वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं को अपनाया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में भी ऊर्जा बचत और संसाधनों के सीमित उपयोग की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने सरकार को घेरा
प्रधानमंत्री की अपील के बाद लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जनता को यह बताना कि क्या खरीदना है और क्या नहीं, सरकार की विफलता को दिखाता है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हर बार जिम्मेदारी जनता पर डालकर सरकार जवाबदेही से बचने की कोशिश करती है।
खाद और ईंधन पर भी बोले प्रधानमंत्री
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में जहां खाद की एक बोरी करीब तीन हजार रुपए में बिक रही है, वहीं भारत में किसानों को वही खाद करीब 300 रुपए में उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार किसानों को राहत देने के लिए लगातार सब्सिडी दे रही है।
बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
प्रधानमंत्री की अपील और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्ष इसे आर्थिक हालात से जोड़कर सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार इसे वैश्विक संकट के बीच जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की जरूरत बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है।