महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों की मतगणना से ठीक पहले सियासत एक बार फिर गरमा गई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह जनता को गुमराह कर लोकतंत्र में भरोसे को कमजोर कर रहा है। राहुल के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दे दिया, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए।
चुनाव आयोग पर राहुल गांधी का सीधा हमला
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘वोट चोरी’ जैसी गतिविधियां लोकतंत्र के लिए खतरा हैं और इससे आम नागरिकों का भरोसा खत्म हो रहा है। राहुल के मुताबिक, जब संस्थाएं निष्पक्ष नहीं दिखतीं, तो लोकतंत्र कमजोर होता है। यह बयान उन्होंने महाराष्ट्र निकाय चुनाव की मतगणना शुरू होने से कुछ देर पहले दिया।
हार से ध्यान भटकाने की कोशिश: बीजेपी
राहुल गांधी के आरोपों पर सत्ता पक्ष ने कड़ा पलटवार किया। नेताओं का कहना है कि विपक्ष संभावित हार को देखते हुए अब चुनाव आयोग को निशाना बना रहा है। उनका दावा है कि यह रणनीति चुनावी नतीजों से ध्यान हटाने और हार की जिम्मेदारी किसी और पर डालने की कोशिश है। सत्ता पक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाना जनता के फैसले का अपमान है।
‘बहाना ब्रिगेड’ और तीखे सियासी आरोप
सत्ता पक्ष के नेताओं ने राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्ष को ‘बहाना ब्रिगेड’ करार दिया। उनका कहना है कि गिनती पूरी होने से पहले ही हार की आशंका साफ दिख रही है। नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार गलत जानकारी फैलाकर माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है, जबकि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी बड़े स्तर की अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है।
देशद्रोह जैसे शब्दों तक पहुंची सियासत
राजनीतिक बयानबाजी इस हद तक पहुंच गई कि राहुल गांधी पर देशद्रोह जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए। सत्ता पक्ष के प्रवक्ताओं ने कहा कि जब भी चुनावी नतीजे विपक्ष के पक्ष में नहीं होते, तो वह संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर देता है। उनके अनुसार, निकाय चुनावों के रुझान कांग्रेस के लिए निराशाजनक संकेत दे रहे हैं।
क्या है ‘स्याही विवाद’ और आयोग की जांच
इस पूरे विवाद के केंद्र में ‘स्याही विवाद’ भी रहा। मतदान के बाद कुछ वीडियो और दावों में कहा गया कि मतदाताओं की उंगली पर लगाई गई अमिट स्याही आसानी से मिट रही थी। विपक्ष ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर स्याही की जगह मार्कर का इस्तेमाल किया गया। इन आरोपों के बाद राज्य चुनाव आयोग ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए और कहा कि वायरल दावों की सत्यता की जांच की जाएगी।