Rahul Gandhi Supreme Court Petition : चुनाव में वोटर लिस्ट को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। राहुल गांधी और विपक्ष के 12 अन्य नेताओं की याचिका पर 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। इस मामले में विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को सही बताते हुए कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। ऐसे में अब इस मामले में कोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजर है। चलिए जानते हैं पूरा मामला।
राहुल गांधी समेत 13 नेताओं ने क्यों दायर की याचिका
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्ष के 12 अन्य नेताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में वोटर लिस्ट में बड़े स्तर पर नाम हटाने और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसलों की जांच होनी चाहिए। नेताओं ने कोर्ट से इस पूरी प्रक्रिया में दखल देने की मांग की है।
चुनाव आयोग के फैसलों पर उठे सवाल
विपक्ष की याचिका में आरोप लगाया गया है कि एसआईआर से जुड़े कुछ अहम फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ने दूसरे चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद लिए। इसी मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग की काम करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। विपक्ष चाहता है कि आयोग के फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड, बैठक की जानकारी और दूसरी जरूरी बातें सामने आएं, ताकि पूरे मामले की जांच हो सके। हालांकि, ये विपक्ष की तरफ से लगाए गए आरोप हैं, जिन पर कोर्ट में सुनवाई जारी है।
चुनाव आयोग ने आरोपों पर क्या कहा
इस मामले में चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि एसआईआर से जुड़े तीनों फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि याचिका की बुनियाद एक समाचार रिपोर्ट पर टिकी है। इसके अलावा, आयोग ने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव किए जाने की बात से भी इनकार किया है। अब आयोग के इस जवाब और विपक्ष के आरोपों पर कोर्ट में विचार किया जाएगा।
एसआईआर को लेकर क्या है पूरा विवाद
एसआईआर का मकसद वोटर लिस्ट को अपडेट करना है, ताकि मृत लोगों और दूसरी जगह जा चुके मतदाताओं के नामों को लेकर रिकॉर्ड सही किया जा सके। लेकिन इस प्रक्रिया में वोटरों के नाम हटाए जाने और फैसले लेने के तरीके पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष को चिंता है कि कहीं सही मतदाताओं के नाम भी सूची से न हट जाएं। इसी वजह से वोटर लिस्ट में बदलाव का मुद्दा राजनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा बन गया है।
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अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग का जवाब भी अहम माना जा रहा है। इस मामले में कोर्ट के सामने आयोग के फैसलों की प्रक्रिया और विपक्ष की शिकायतों से जुड़े सवाल हैं। फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोपों को साबित हुआ नहीं माना जा सकता। अब आगे की सुनवाई में यह देखना होगा कि कोर्ट इस मामले में क्या निर्देश देता है और वोटर लिस्ट से जुड़े विवाद पर क्या रुख अपनाता है।