Election Row: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कथित हेराफेरी, वोटों में गड़बड़ी और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। राहुल ने कहा कि अगर वोट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है तो इसका असर कानून, संस्थाओं और लोकतंत्र की पूरी व्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने बीजेपी की लगातार चुनावी सफलता और एंटी-इनकंबेंसी को लेकर भी कई सवाल सामने रखे।
वोट पर सवाल, चुनावी प्रक्रिया पर बड़ा आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हेराफेरी हुई और वोट खत्म किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह 2023 से इस मुद्दे को सबूतों के साथ उठाते आ रहे हैं। राहुल का दावा है कि उनके पास वोट चोरी को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पद पर ज्ञानेश कुमार बैठे हैं, उन्हें पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और इस्तीफा दे देना चाहिए। राहुल ने यह भी कहा कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा कायम रहना लोकतंत्र के लिए जरूरी है।
CEC ज्ञानेश कुमार पर राहुल गांधी का सीधा निशाना
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने भी उनसे जुड़े मामलों पर सवाल उठाए हैं। राहुल ने कहा कि वोट से ही कानून बनते हैं और अगर वोट खत्म हो जाता है तो कानून और संस्थाओं की बुनियाद भी प्रभावित होती है। उन्होंने केंद्र सरकार पर CEC को कानूनी सुरक्षा देने का आरोप लगाया। राहुल ने कहा कि चुनाव आयोग के भीतर से सामने आ रही जानकारियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है और इस मामले पर विपक्ष चुप नहीं बैठेगा।
‘वोट चोरी’ से ‘कानून चोरी’ तक पहुंचा राहुल का आरोप
राहुल गांधी ने अपने आरोपों को सिर्फ चुनावी धांधली तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि अगर किसी चुनाव में वोटों को कथित तौर पर प्रभावित किया गया और उसके आधार पर किसी उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित किया गया, तो उस चुनाव की वैधता पर सवाल उठता है। उन्होंने इसे ‘वोट चोरी’ से आगे ‘कानून चोरी’ और ‘संस्था चोरी’ से जोड़ते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती सीधे मतदाता के अधिकार से जुड़ी है। राहुल ने हरियाणा चुनाव में कथित अनियमितताओं का भी जिक्र किया और चुनाव प्रक्रिया की जांच की मांग उठाई।
बीजेपी की जीत और एंटी-इनकंबेंसी पर बड़ा सवाल
राहुल गांधी ने बीजेपी की चुनावी सफलता को लेकर एक अलग सवाल भी उठाया। उन्होंने पूछा कि भारत में लगभग हर सरकार को किसी न किसी समय एंटी-इनकंबेंसी का सामना करना पड़ा है, फिर बीजेपी और नरेंद्र मोदी के खिलाफ यह प्रभाव क्यों नहीं दिखाई देता। उन्होंने इंदिरा गांधी, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात के चुनावी उदाहरणों का जिक्र किया। राहुल ने कहा कि किसी नेता की लोकप्रियता या सरकार के कामकाज को समझा जा सकता है, लेकिन उनके अनुसार एंटी-इनकंबेंसी का पूरी तरह गायब हो जाना उनके लिए एक बुनियादी सवाल है।
राहुल के आरोपों से चुनावी पारदर्शिता पर बहस तेज
राहुल गांधी ने कहा कि वह हवा में बात नहीं कर रहे हैं और चुनावों में कथित धांधली को लेकर उनके पास सबूत हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि वे कथित चुनावी साजिश का हिस्सा हैं। ये राहुल गांधी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग चुनावी प्रक्रिया और अपने निर्णयों का बचाव करता रहा है। ऐसे में राहुल के बयानों ने एक बार फिर मतदाता सूची, चुनावी पारदर्शिता, चुनाव आयोग की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।