Politics Women Reservation Parliament Rahul Gandhi---महिला आरक्षण को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के महिलाओं के अधिकारों से जुड़े वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस से महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करने की उम्मीद जताई थी। अब राहुल गांधी ने जवाब देते हुए कहा है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने की जरूरत नहीं है और इसे लागू किया जाना चाहिए। दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे को लेकर बातचीत भी चर्चा में है।
राहुल गांधी का वीडियो बना सियासी बहस की वजह
कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी का एक वीडियो साझा किया गया था। इसमें राहुल गांधी महिलाओं की स्वतंत्रता और उनकी अभिव्यक्ति के अधिकार पर बात करते नजर आए। उन्होंने कहा कि भारत की महिलाओं में ऊर्जा और क्षमता की कमी नहीं है, लेकिन कई बार उन्हें खुद को व्यक्त करने और अपनी कल्पनाओं को आगे बढ़ाने की पूरी आजादी नहीं मिलती। राहुल गांधी ने कहा कि कोई भी देश तब तक पूरी तरह सफल नहीं हो सकता, जब तक वहां की महिलाएं अपनी क्षमता और विचारों को पूरी तरह सामने नहीं ला पातीं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी राजनीति और देश की राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इस सोच से जुड़ा होना चाहिए कि महिलाओं की भागीदारी और अभिव्यक्ति के बिना भारत अधूरा और अविकसित रहेगा।
रिजिजू ने तारीफ के साथ साधा राजनीतिक निशाना
राहुल गांधी के इस वीडियो को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने री-पोस्ट किया और इसे कांग्रेस की ओर से एक सकारात्मक संदेश बताया। रिजिजू ने राहुल गांधी की महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव की बात कही और उम्मीद जताई कि कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी। रिजिजू की टिप्पणी में तारीफ के साथ-साथ राजनीतिक तंज भी दिखाई दिया। इसके बाद महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर संसद की राजनीति के केंद्र में आ गया। रिजिजू के बयान के बाद राहुल गांधी की ओर से आया जवाब भी इसी बहस को आगे बढ़ाता है, जिसमें उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर सवाल उठाया है।
‘परिसीमन से क्यों जोड़ना चाहते हैं’, राहुल का सवाल
राहुल गांधी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसे परिसीमन से बेवजह जोड़ने की जरूरत क्यों है। उनका कहना है कि महिला आरक्षण को लागू किया जाना चाहिए। इस बयान के साथ उन्होंने उस राजनीतिक बहस को फिर सामने ला दिया है, जिसमें महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया और परिसीमन के बीच संबंध को लेकर सवाल उठते रहे हैं। राहुल गांधी का जोर सीधे महिला आरक्षण लागू करने पर है। वहीं, केंद्र की ओर से इस विषय पर आगे की प्रक्रिया को लेकर अलग राजनीतिक और संवैधानिक तर्क दिए जाते रहे हैं। ऐसे में राहुल का यह बयान आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे पर विपक्ष की रणनीति का संकेत माना जा सकता है।
दस दिन में दो मुलाकातों ने बढ़ाई चर्चा
महिला आरक्षण को लेकर बयानबाजी के बीच राहुल गांधी और किरेन रिजिजू की मुलाकातें भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई हैं। संसद में जारी गतिरोध के दौरान संसदीय कार्य मंत्री ने लोकसभा में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। खास बात यह है कि करीब दस दिनों के भीतर दोनों नेताओं की दो बार मुलाकात होने की बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, इन मुलाकातों में परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव पर भी बातचीत हुई। हालांकि दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का पूरा विवरण सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया है, लेकिन लगातार हो रही मुलाकातों ने इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलों को जरूर बढ़ा दिया है।
महिला आरक्षण पर आगे क्या होगा?
महिला आरक्षण को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच अब राजनीतिक बहस का दायरा बढ़ता दिख रहा है। एक तरफ राहुल गांधी महिलाओं की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी को लेकर अपनी बात मजबूती से रख रहे हैं, वहीं रिजिजू कांग्रेस से महिला आरक्षण विधेयक पर स्पष्ट समर्थन की अपेक्षा जता रहे हैं। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि संसद में महिला आरक्षण को लेकर आगे क्या रुख सामने आता है। राहुल गांधी का परिसीमन से इसे अलग रखने का बयान इस बहस को नया राजनीतिक कोण देता है। आने वाले दिनों में अगर सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ती है, तो महिला आरक्षण और परिसीमन दोनों ही संसद की राजनीति में महत्वपूर्ण विषय बने रह सकते हैं।