संसद में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन को लेकर चल रही बहस शुक्रवार को भी तेज रही। देर रात तक चली चर्चा के बाद आज दोपहर से फिर सदन में गरमाहट देखने को मिली। इसी दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण और उनके बयानों पर सदन का माहौल और अधिक राजनीतिक रूप से गर्म हो गया। बहस के बीच स्पीकर द्वारा हस्तक्षेप भी किया गया, जिससे चर्चा का रुख और बदल गया। यह मुद्दा अब केवल कानून नहीं बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन गया है।
बहस के बीच ‘कहानी’ से शुरू हुआ भाषण
सदन में बोलते हुए राहुल गांधी ने अपनी दादी से जुड़ी एक कहानी सुनानी शुरू की। इसी दौरान लोकसभा स्पीकर ने उन्हें टोका और कहा कि विषय बिल पर केंद्रित रखा जाए। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि वह उदाहरण के जरिए अपनी बात समझा रहे हैं और उनकी बात का उद्देश्य मुद्दे को स्पष्ट करना है।
महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का रुख
राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा प्रस्ताव वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ा वास्तविक बिल नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इसका उद्देश्य चुनावी ढांचे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बदलाव से जुड़ा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि पुराना प्रस्ताव लागू किया जाता है तो कांग्रेस समर्थन देने के लिए तैयार है।
ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व का मुद्दा
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि समाज के कमजोर वर्गों, खासकर ओबीसी और दलित समुदायों के प्रतिनिधित्व को लेकर गंभीर सवाल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा ढांचा इन वर्गों को पर्याप्त राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं देता और इसे बदलने की जरूरत है।
सत्ता पक्ष का पलटवार
विपक्ष के आरोपों के जवाब में सत्ता पक्ष की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। इस दौरान ओबीसी आरक्षण और ऐतिहासिक फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए। सदन में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस ने माहौल को और गरमा दिया।
कानून लागू होने की प्रक्रिया और आगे की राह
सरकार द्वारा ‘महिला आरक्षण अधिनियम-2023’ के लागू होने के बाद अब यह व्यवस्था परिसीमन और जनगणना से जुड़ी प्रक्रिया पर निर्भर है। मौजूदा सीट संरचना में बदलाव के बाद ही यह पूरी तरह प्रभावी होगा। फिलहाल तीनों संशोधन विधेयकों पर चर्चा जारी है और आगे वोटिंग का इंतजार है।