टाटा समूह को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आरोपों पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब दिया है। उन्होंने राहुल गांधी पर कारोबारी मामलों का राजनीतिकरण करने और बिना पर्याप्त आधार के गंभीर आरोप लगाने का आरोप लगाया। सीतारमण ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को हर जगह साजिशें देखना बंद करना चाहिए। इस बयान के बाद केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर साधा निशाना
वित्त मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी बार-बार भारतीय कंपनियों और उद्यमियों की उपलब्धियों पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयानों से कारोबारी जगत के प्रति अविश्वास का माहौल बन सकता है। सीतारमण ने कांग्रेस के शासनकाल के दौरान लागू लाइसेंस और कोटा व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि इससे भारतीय उद्यमियों की संभावनाएं प्रभावित हुई थीं।
मोदी सरकार की नीतियों का किया बचाव
निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार उद्योगों को आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का अहम माध्यम मानती है। उनके मुताबिक, सरकार की नीतियों का उद्देश्य कारोबार को प्रोत्साहन देना, उद्योगों को समर्थन देना और निवेश बढ़ाना है। उन्होंने राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की कि वे उद्योगों, किसानों और युवाओं के हितों को ध्यान में रखकर जिम्मेदारी से काम करें।
यह भी देखेंःकेंद्रीय कर्मचारियों के DA में 3% बढ़ोतरी! अक्टूबर की सैलरी में कितना होगा फायदा?
न्यायपालिका को लेकर भी दिया जवाब
वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को न्याय की गारंटी देता है और न्यायपालिका की जिम्मेदारी इसका संरक्षण करना है। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस पर न्यायपालिका के प्रति उनके रवैये को लेकर भी सवाल उठाए। सीतारमण ने कहा कि व्यावसायिक और कानूनी विवादों को बिना पर्याप्त आधार के आपराधिक मामला बताना उचित नहीं है। उन्होंने नेताओं से आरोप लगाने के बजाय रचनात्मक चर्चा करने की अपील की।
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
इससे पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर टाटा समूह का जिक्र करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि टाटा समूह को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाया जा रहा है और कारोबारी जगत के प्रमुख लोग इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। राहुल ने यह भी कहा कि भारतीय कारोबारियों को राजनीतिक नेताओं के प्रभाव से स्वतंत्र रहना चाहिए और कथित गलत कार्यों के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। इन आरोपों पर निर्मला सीतारमण ने पलटवार करते हुए उन्हें राजनीतिक एजेंडे के बजाय तथ्यों के आधार पर बात करने की सलाह दी।