Railway Compensation Case : कन्फर्म टिकट होने के बावजूद अगर रिजर्व बर्थ पर दूसरे यात्री कब्जा कर लें तो सफर बेहद मुश्किल हो सकता है। ऐसा ही मामला एक बुजुर्ग दंपती और उनके बेटे के साथ सामने आया। ट्रेन में भीड़ और अनधिकृत यात्रियों की वजह से परिवार को अपनी आरक्षित सीटों का पूरा लाभ नहीं मिल सका। मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जहां रेलवे की सेवा में कमी मानते हुए परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया गया।
बुजुर्ग दंपती ने बुक की थी सीट
मामला 10 दिसंबर 2023 का है। पार्थसारथी, उनकी पत्नी निर्मला केटी और बेटे आदित्य टीपी ने कन्याकुमारी-पुणे एक्सप्रेस से तिरुपति जाने के लिए कन्फर्म टिकट बुक किए थे। बुजुर्ग दंपती ने ओट्टापलम से ट्रेन पकड़ी थी और S2 कोच में लोअर बर्थ मिली थी। वहीं बेटे आदित्य को S6 कोच में अपर बर्थ मिली थी। परिवार के मुताबिक ट्रेन में चढ़ने के बाद कई बिना टिकट और बिना रिजर्वेशन वाले यात्री आरक्षित कोचों में मौजूद थे।
शिकायत के बाद भी नहीं सुलझी समस्या
परिवार का आरोप था कि कुछ यात्रियों ने उनकी आरक्षित सीटों पर भी कब्जा कर लिया था। यात्रा आगे बढ़ने के साथ कोच में भीड़ बढ़ती गई और कई यात्री फर्श, बर्थ के नीचे तथा सीटों के आसपास बैठे या सोते नजर आए। आदित्य ने रात करीब 8:12 बजे RailMadad पर शिकायत दर्ज की। इसके बाद रात 11:24 बजे दूसरी शिकायत में S6 कोच की स्थिति की जानकारी दी गई। रेलवे ने कार्रवाई का दावा किया, लेकिन परिवार का कहना था कि समस्या पूरी तरह दूर नहीं हुई।
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तस्वीरों को माना गया सबूत
परिवार ने बाद में उपभोक्ता आयोग का रुख किया। पालक्काड जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान ट्रेन के अंदर ली गई तस्वीरों को अहम सबूत माना। तस्वीरों में कोच में भारी भीड़ दिखाई दे रही थी। रेलवे का कहना था कि शिकायत मिलने के बाद TTE और RPF ने मौके पर पहुंचकर अनधिकृत यात्रियों को हटाया था, लेकिन आयोग ने माना कि रेलवे अपने दावे को पर्याप्त सबूतों से साबित नहीं कर सका।
रेलवे पर लगा ₹75 हजार जुर्माना
आयोग ने माना कि कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है। इस मामले में रेलवे उस जिम्मेदारी को पूरा करने में नाकाम रहा, जिसे सेवा में कमी माना गया। आयोग ने रेलवे को परिवार को 50 हजार रुपये मुआवजा और 25 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के तौर पर देने का आदेश दिया। यानी रेलवे को कुल 75 हजार रुपये का भुगतान करना होगा। रकम 45 दिनों के भीतर देनी होगी। देरी होने पर अतिरिक्त भुगतान का भी आदेश दिया गया है।