Indore News: सिंहस्थ 2028 के मद्देनज़र इंदौर रेलवे स्टेशन का बड़ा रेनोवेशन प्रोजेक्ट शुरू किया गया था, लेकिन इसके पूरा होने पर अब सवाल उठने लगे हैं। 450 करोड़ की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट तीन साल में पूरा होना मुश्किल लग रहा है। स्टेशन की पुरानी इमारत तोड़ने का काम भी अधूरा है। सिंहस्थ करीब आते ही यात्रियों की चिंताएं बढ़ गई हैं कि क्या तब तक आधुनिक स्टेशन तैयार हो पाएगा या नहीं।
सिंहस्थ तक काम पूरा होना चुनौती
साल 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ मेला आयोजित होगा। हर बार की तरह लाखों श्रद्धालु इंदौर होकर उज्जैन पहुंचेंगे। ऐसे में रेलवे स्टेशन का तैयार होना बेहद जरूरी है। लेकिन मौजूदा स्थिति में प्रोजेक्ट की गति काफी धीमी है। इससे श्रद्धालुओं और यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
भूमिपूजन के बाद भी धीमी रफ्तार
इस प्रोजेक्ट का भूमिपूजन एक साल पहले वर्चुअल तरीके से किया गया था। ठेका भी एक निर्माण कंपनी को मिल चुका है, लेकिन काम की शुरुआत अब तक अधूरी है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि सिंहस्थ तक जरूरी हिस्सों का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा, मगर मौके की स्थिति इससे अलग दिखाई देती है।
निर्माण के दौरान बदलेगा ट्रेन संचालन
काम के चलते कुछ ट्रेनों का संचालन लक्ष्मीबाई नगर से किया जाएगा। वहीं इंदौर मुख्य स्टेशन पर भी निर्माण कार्य के साथ-साथ गाड़ियों का संचालन जारी रहेगा। प्लेटफॉर्म बदले जाने से यात्रियों को नियमित यात्रा में भी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
सात मंजिला होगी नई इमारत
रेनोवेशन के बाद इंदौर रेलवे स्टेशन बिल्कुल हवाई अड्डे जैसा दिखेगा। नई सात मंजिला इमारत में बेसमेंट पार्किंग, 26 लिफ्ट, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और फूड ज़ोन बनाए जाएंगे। लगभग 500 वाहनों की पार्किंग की सुविधा होगी। नए प्लेटफार्म सीधे क्रम में होंगे, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना घटेगी। इसके अलावा फुट ओवरब्रिज, एस्केलेटर और आधुनिक टिकट काउंटर भी यात्रियों की सुविधा बढ़ाएंगे।
यात्रियों को अब इंतजार
स्टेशन का यह नया रूप इंदौर और उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए वरदान साबित हो सकता है, लेकिन काम की धीमी रफ्तार इसे सिंहस्थ से पहले पूरा करना कठिन बना रही है। अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन और संबंधित विभाग कितनी तेजी से काम आगे बढ़ाते हैं।