भोपाल के बैरागढ़ इलाके में स्थित संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब नियमित चेकिंग के दौरान रेलवे सुरक्षा बल ने वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया। दो बैगों से 311 जीवित कछुए बरामद होने के बाद एक आरोपी को मौके से गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई से अवैध वन्यजीव व्यापार की गंभीरता एक बार फिर सामने आई है।
स्टेशन पर संदिग्ध गतिविधि से खुला मामला
रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के दौरान आरपीएफ कर्मियों को एक व्यक्ति की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। तलाशी लेने पर उसके पास मौजूद दो बड़े बैगों से भारी संख्या में कछुए मिले। शुरुआती गिनती में कुल 311 जीवित कछुए पाए गए, जिन्हें बेहद तंग हालात में रखा गया था। तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई और बैगों को जब्त कर लिया गया।
कोच अटेंडर निकला आरोपी
पूछताछ में आरोपी की पहचान कोच में अटेंडर के तौर पर काम करने वाले अजय सिंह राजपूत के रूप में हुई। वह ट्रेन के जरिए इन कछुओं को दूसरे शहरों तक पहुंचाने की तैयारी में था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि तस्करी को सामान्य सामान की तरह छिपाकर ले जाया जा रहा था, ताकि किसी को शक न हो।
ढाई हजार के लालच में सप्लाई की तैयारी
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसे महज ढाई हजार रुपये का लालच देकर यह काम सौंपा गया था। उसका कहना है कि कछुओं की सप्लाई देवास और इंदौर में की जानी थी। आरोपी ने एक अन्य व्यक्ति का नाम भी बताया, जिसने कथित तौर पर उसे इस अवैध धंधे में शामिल किया।
संयुक्त टीम की कार्रवाई और जांच
सूचना मिलने के बाद वन विभाग और विशेष जांच टीम मौके पर पहुंची और संयुक्त रूप से आगे की कार्रवाई शुरू की गई। बरामद कछुओं की जांच की गई, जिसमें वे फिलहाल स्वस्थ पाए गए। सभी कछुओं को निगरानी में सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, जबकि पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए पूछताछ का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत केस
आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की तस्करी जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। आगे की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह से और कौन-कौन जुड़े हैं तथा कछुओं को कहां से लाया गया था।