Railways Now Cooks Food: वैश्विक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी आशंकाओं के बीच भारतीय रेलवे ने अपने खानपान सिस्टम में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। रेलवे की कैटरिंग सेवा संभालने वाली संस्था Indian Railway Catering and Tourism Corporation अब धीरे-धीरे फ्लेमलेस किचन मॉडल की ओर बढ़ रही है। इस पहल का उद्देश्य गैस पर निर्भरता कम करना और भोजन व्यवस्था को बिना बाधा जारी रखना है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों को मिलने वाली भोजन सेवा सामान्य रूप से जारी है और इसमें किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जा रही है।
इंडक्शन पर खाना बनाने की पहल
आईआरसीटीसी के अधिकारियों के अनुसार बेस किचन में अब लगभग 60 प्रतिशत भोजन इलेक्ट्रिक इंडक्शन सिस्टम पर तैयार किया जा रहा है। दाल, चावल और सब्जियों की ग्रेवी जैसे कई व्यंजन इलेक्ट्रिक कुकिंग सिस्टम से बनाए जा रहे हैं। इस तकनीक के इस्तेमाल से गैस सिलेंडर पर निर्भरता घट रही है और ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों का उपयोग बढ़ रहा है।
रोजाना लाखों यात्रियों को भोजन
रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था देशभर में बड़ी संख्या में यात्रियों तक भोजन पहुंचाती है। अधिकारियों का कहना है कि हर दिन करीब 16 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इंडक्शन आधारित किचन व्यवस्था के बावजूद भोजन की गुणवत्ता और आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दिया जा रहा है, ताकि यात्रियों को नियमित सेवा मिलती रहे।
यह भी देखेंःMeetings Even On Weekends: संसद के कामकाज को रफ्तार देने की तैयारी, वीकेंड पर भी बैठक का प्रस्ताव
भविष्य की योजना तैयार
रेलवे की योजना केवल इंडक्शन कुकिंग तक सीमित नहीं है। कई बेस किचनों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की तैयारी भी की जा रही है। इससे बिजली की जरूरत का एक हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकेगा और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया और अधिक ऊर्जा-सक्षम बन सकेगी।
गैस पर निर्भरता कम
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि फ्लेमलेस किचन मॉडल अपनाने से संचालन अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित होगा। इलेक्ट्रिक और सौर ऊर्जा जैसे विकल्पों के उपयोग से आपूर्ति प्रणाली मजबूत होगी और भविष्य में ऊर्जा संकट जैसी परिस्थितियों से निपटना भी आसान हो सकेगा।