
हिमाचल प्रदेश में मानसून का प्रकोप बना हुआ है। राज्य के कई भागों में व्यापक बारिश लगातार जारी है। जनजीवन अस्त-व्यस्त बना हुआ है। ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी होने से पहाड़ों में ठंड बढ़ गई है। मौसम विभाग ने 27 अगस्त तक प्रदेश के कुछ भागों में में भारी वर्षा का येलो अलर्ट जारी किया है। इसके बाद 28 से 30 अगस्त तक भी मौसम खराब रहने की संभावना है। इस दौरान किसी तरह की चेतावनी जारी नहीं की गई है।
95 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, रविवार शाम तक हिमाचल में 2 नेशनल हाइवे और 482 सड़कें बंद रहीं। इनमें अकेले मंडी जिले में 245 और कुल्लू में 101 सड़कें बंद हैं। चंबा में 82 और कांगड़ा में 21 सड़कें बंद हैं। इसके अलावा प्रदेशभर में 941 बिजली ट्रांसफार्मर और 95 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। मंडी जिले में 477 ट्रांसफार्मर और 36 पेयजल योजनाएं ठप पड़ी हैं।
हिमाचल प्रदेश में 20 जून से शुरू हुए मानसून सीजन ने भारी नुकसान पहुंचाया है। अब तक 303 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसमें मंडी 51, कांगड़ा में 48-48, चंबा में 36, शिमला में 28, किन्नौर और कुल्लू में 26-26 तथा अन्य जिलों में कुछ मौतें शामिल हैं। इसके अलावा 37 लोग अभी भी लापता हैं और 360 लोग घायल हुए हैं।
तीन हजार मकान क्षतिग्रस्त हो गए
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार अब तक 3 हजार मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इनमें 684 मकान पूरी तरह ढह गए हैं। अकेले मंडी जिले में 1,456 मकानों को क्षति पहुंची। इसमें 490 मकान पूरी तरह ध्वस्त हुए। राज्यभर में 465 दुकानें और 2,766 पशुशालाएं को ध्वस्त हो गए हैं। इस दौरान पालतू पशु और पोल्ट्री पक्षी मारे गए हैं। प्रदेश को अब तक करीब 2,348 करोड़ रुपये का नुकसान सामने आया है। इसमें लोक निर्माण विभाग को 1,310 करोड़ और जलशक्ति विभाग को 769 करोड़ रुपये की क्षति हुई है।