नौतपा में पहले ही दिन बरसात ! क्या यह अच्छे मानसून का संकेत है या अनहोनी की दस्तक?
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नौतपा में पहले ही दिन बरसात ! क्या यह अच्छे मानसून का संकेत है या अनहोनी की दस्तक?
लोकसत्य
रविवार, 25 मई 2025 • 7:36 pm
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धरती पर गर्मी की सबसे तपती अवधि माने जाने वाले नौतपा की शुरुआत इस बार कुछ अलग ही अंदाज़ में हुई है। जिस समय सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, उस दिन से नौतपा का आरंभ होता है। लोक परंपराओं और कृषि संस्कृति में इस नौ दिनों को लेकर गहरी मान्यताएं जुड़ी हैं। माना जाता है कि जितना नौतपा तपेगा, उतनी ही बारिश अच्छी होगी और फसलें लहलहाएंगी। लेकिन इस बार नौतपा के पहले ही दिन झमाझम बारिश हो गई। इससे न सिर्फ लोगों की उम्मीदों को झटका लगा, बल्कि कई लोगों ने इसे अपशकुन भी माना। सवाल उठता है कि क्या यह आने वाले मौसम के लिए खतरे की घंटी है या कोई गूढ़ संदेश।
नौतपा और बारिश का गहरा रिश्ता
भारतीय कृषि परंपरा में नौतपा का मौसम बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पुरानी लोकोक्तियों में इसका मौसम से सीधा संबंध बताया गया है। जैसे “पैली रोहण जल हरै, बीजी बोवोतर खाए…” यानी शुरुआत में बारिश हो तो अकाल पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। यही कारण है कि किसान और ग्रामीण समाज नौतपा की गर्मी को अच्छे मानसून का संकेत मानते हैं।
क्या कहते हैं संकेत?
लोक मान्यताओं के अनुसार, नौतपा के शुरू में बारिश अकाल की आशंका बढ़ाती है, मध्य में बारिश लंबे सूखे का संकेत देती है, और अंत में बारिश सूखे की स्थिति पैदा करती है। केवल चौथे हिस्से में बारिश अच्छे मानसून का संकेत मानी जाती है। इस बार पहले दिन की बारिश ने किसानों और ज्योतिषियों के बीच चर्चा का माहौल बना दिया है।
नौतपा के रहस्य को समझे बिना बारिश का अनुमान अधूरा
मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि चंद्रमा की गति भी इस दौरान प्रभाव डालती है। यदि नौतपा के बीच में बारिश हो जाए तो बारिश देर से आती है और अल्प होती है। यही कारण है कि ग्रामीण लोक संस्कृति में नौतपा की गर्मी को नहीं बल्कि उसके समय को देखना भी उतना ही जरूरी माना गया है।
मारवाड़ी लोकोक्ति और बारिश का संदेश
मारवाड़ी कहावत में नौतपा के प्रत्येक दिन का अलग महत्व है। यदि पहले दो दिन बारिश हो, तो चूहे और कीट-पतंगे बढ़ सकते हैं। तीसरे-चौथे दिन बारिश टिड्डियों और जहरीले जीवों को बढ़ावा देती है। पांचवें-छठे दिन लू न चले तो आंधी-तूफान का खतरा रहता है, और आखिरी दो दिनों में बारिश विषैले जीवों को बढ़ाती है। पहले दिन की बारिश ने इन संकेतों को और रहस्यमय बना दिया है।