Nagon Ki Adalat, Raisen ---मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में नागपंचमी के मौके पर एक ऐसी अनोखी परंपरा देखने को मिलती है, जिसे स्थानीय लोग ‘नागों की अदालत’ कहते हैं। गैरतगंज तहसील के सीहोरा खुर्द गांव में हर साल होने वाले इस आयोजन में सर्पदंश का सामना कर चुके लोग पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां नागदेव के सामने उनकी ‘पेशी’ होती है और शरीर में नाग की आत्मा आने का दावा कर सर्पदंश से जुड़ी वजह बताई जाती है।
शेषनाग के सामने होती है ‘पेशी’
सीहोरा खुर्द के श्रीराम रसियाधाम में नागदेव का एक चबूतरा है। नागपंचमी के दिन यहां विशेष आयोजन होता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जिन लोगों को कभी सांप ने काटा था, वे इस धार्मिक आयोजन में पहुंचकर अपनी बात रखते हैं। इसे ही स्थानीय लोग नागों की अदालत का नाम देते हैं। इस दौरान कोई वकील या गवाह नहीं होता, बल्कि पूरी प्रक्रिया धार्मिक मान्यताओं और आस्था से जुड़ी बताई जाती है।
शरीर में नाग की आत्मा आने का दावा
आयोजन से जुड़ी मान्यता के मुताबिक, सर्पदंश का सामना कर चुके कुछ लोगों के शरीर में नाग की आत्मा आने का दावा किया जाता है। इसके बाद वह व्यक्ति मंदिर के पुजारी के सामने अपनी ‘पेशी’ देता है। बताया जाता है कि नाग के रूप में सर्पदंश की वजह बताई जाती है और भविष्य में किसी को नुकसान नहीं पहुंचाने का वचन भी लिया जाता है।स्थानीय लोगों का दावा है कि ऐसे मामलों में कई लोग अपनी समस्या लेकर यहां पहुंचते हैं। हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया धार्मिक विश्वास और स्थानीय मान्यता पर आधारित है।
आसपास के जिलों से पहुंचते हैं लोग
नागपंचमी के दिन इस आयोजन को देखने और इसमें शामिल होने के लिए आसपास के कई क्षेत्रों से लोग सीहोरा खुर्द पहुंचते हैं। रायसेन जिले के सिलवानी, बरेली, उदयपुरा, सुल्तानपुर, औबेदुल्लागंज और बेगमगंज समेत कई इलाकों से श्रद्धालुओं के आने की बात सामने आती है। इसके अलावा सीहोर, भोपाल और सागर जिले से भी लोग इस आयोजन में पहुंचते हैं।
सैकड़ों लोगों से जुड़ी है मान्यता
सीहोरा खुर्द की इस परंपरा को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं। बताया जाता है कि अब तक 500 से ज्यादा लोग इस तरह की ‘पेशी’ में शामिल हो चुके हैं। आयोजन में शामिल होने वाले लोग इसे नागदेव से जुड़ी आस्था और अपनी समस्याओं के समाधान की परंपरा के रूप में देखते हैं। यही वजह है कि हर साल नागपंचमी पर यहां बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रहती है।
आस्था के बीच जरूरी है सावधानी
नागों की अदालत से जुड़ी मान्यताएं स्थानीय आस्था का हिस्सा हैं, लेकिन सर्पदंश की स्थिति में इसे इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। सांप के काटने पर किसी धार्मिक आयोजन या घरेलू उपाय पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है। सर्पदंश गंभीर स्थिति हो सकती है और समय पर चिकित्सकीय उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। इस तरह के आयोजनों को धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।