महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर विवाद भड़क गया है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को खुली चुनौती दी है कि अगर सरकार छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक किलों पर ‘NaMo टूरिज्म सेंटर’ बनाती है, तो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) उसे तोड़ देगी। राज ठाकरे ने कहा कि ये किले सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि राज्य की अस्मिता और श्रद्धा के प्रतीक हैं। सरकार ने अगर कदम उठाया तो इसका कड़ा विरोध होगा।
शिवाजी के किलों पर NaMo सेंटर को लेकर विवाद
राज ठाकरे ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार शहरी विकास विभाग के माध्यम से किलों पर ‘NaMo सेंटर’ बनाने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज के किले पवित्र स्थल हैं। अगर वहां कोई राजनीतिक नाम जोड़ने की कोशिश की गई, तो मनसे उसे जड़ से उखाड़ फेंकेगी।” ठाकरे ने यह भी कहा कि ये किले महाराष्ट्र की आत्मा हैं, न कि प्रचार का माध्यम।
एकनाथ शिंदे पर बरसे राज ठाकरे
कार्यक्रम में ठाकरे ने मुख्यमंत्री शिंदे पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “सिर्फ मुख्यमंत्री बने रहने के लिए कितनी चापलूसी करनी पड़ती है! प्रधानमंत्री को भी शायद अंदाजा नहीं है कि महाराष्ट्र में कितनी चटुकारिता हो रही है।” राज ठाकरे के इस बयान को शिंदे सरकार के खिलाफ एक बड़ी राजनीतिक चेतावनी माना जा रहा है।
विपक्ष के साथ एकजुट हुए राज ठाकरे
इस बयान के बाद राज ठाकरे अब विपक्षी गठबंधन ‘महाविकास अघाड़ी’ के साथ भी मंच साझा करते नजर आएंगे। उद्धव ठाकरे, शरद पवार और राज ठाकरे एक नवंबर को मुंबई में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ संयुक्त विरोध मार्च का नेतृत्व करेंगे। इसमें कांग्रेस और वामपंथी दलों के नेता भी शामिल होंगे।
मतदाता सूची की पारदर्शिता पर जोर
विपक्ष की मांग है कि राज्य सरकार मतदाता सूचियों को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाए। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि “यह मुद्दा किसी एक दल का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद से जुड़ा है।” उन्होंने बताया कि कांग्रेस इस विरोध मार्च का पूर्ण समर्थन करेगी, ताकि मतदान प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहे।