राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक स्कूल की तीसरी मंजिल पर हुए जोरदार धमाके से इलाका दहल गया। धमाका इतना तेज था कि आवाज करीब एक किमी दूर तक सुनी गई। हादसे के वक्त कमरे में प्रिंसिपल बालमुकुंद, उनकी पत्नी और तीन बच्चियां सो रहे थे। सभी को हल्की चोटें आई हैं और उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। धमाके का कारण गैस लीकेज बताया जा रहा है, जिससे कमरा गैस चैंबर बन गया था और एक छोटी सी चिंगारी ने बम जैसा असर दिखाया। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से नमूने जुटाए हैं ताकि धमाके की सटीक वजह और गैस के प्रकार का पता लगाया जा सके।
धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए नमूने जुटाए
धमाके के बाद स्कूल प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की है। स्कूल के प्रिंसिपल बालमुकुंद ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए नमूने जुटाए गए हैं।
स्कूल प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाए
स्कूल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से नमूने जुटाए हैं ताकि धमाके के कारणों का पता लगाया जा सके। घायलों के में प्रिंसिपल का परिवार और दो बालिकाएं घायल हुईं हैं। इन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। स्कूल की जांच हो रही है। शिक्षा विभाग ने स्कूल की जांच शुरू की है और जर्जर भवनों की पहचान करने के लिए एक सर्वेक्षण किया जा रहा है। वहीं स्कूलों में सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। स्कूलों में सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें से कुछ प्रमुख उपाय हैं। स्कूलों में सुरक्षा कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे आपातकालीन स्थितियों में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सकें। स्कूलों में सुरक्षा प्रोटोकॉल विकसित किए जा रहे हैं, जिसमें आपातकालीन निकास, अग्नि सुरक्षा, और बिजली व्यवस्था का मूल्यांकन शामिल है।