
दीपावली से ठीक पहले राज्य सरकार ने कर्मचारियों को बड़ा झटका दिया है। सरकार ने पुरानी पेंशन योजना यानी ओपीएस से कदम पीछे खींचते हुए अब फिर नेशनल पेंशन सिस्टम का रास्ता खोल दिया है. कर्मचारियों में इस फैसले को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी फूट पड़ी है. राजस्थान के कर्मचारी संगठन प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने की राह पर उतरने की तैयारी में जुट गए हैं.
संस्था की वित्तीय स्थिति कमजोर
राजस्थान वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य उपक्रमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और बोर्ड-निगमों में अगर किसी संस्था की वित्तीय स्थिति कमजोर है और वह पेंशन दायित्व निभाने में सक्षम नहीं है, तो वह ओपीएस लागू नहीं करेगी। ऐसी संस्थाएं कर्मचारियों या पेंशनरों से ली गई राशि पीड़ित खाते में अर्जित ब्याज सहित लौटा देंगी। साथ ही, पुरानी पेंशन योजना लागू न करने की स्थिति में एनपीएस, सीपीएफ या ईपीएफ व्यवस्था फिर से लागू करनी होगी। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि ये आदेश ओपीएस को खत्म करने की शुरुआत है। सरकार दीपावली से पहले कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी फेर रही है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि इसे तत्काल निरस्त किया जाए।
संस्था में ओपीएस लागू नहीं किया जाता
वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी संस्था में ओपीएस लागू नहीं किया जाता, तो पूर्व में की गई कटौती की राशि ब्याज सहित वापस की जाएगी। हालांकि, कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ये केवल “औपचारिक दिलासा” है, असल में सरकार ने कर्मचारियों का भरोसा तोड़ा है। सरकार को कर्मचारियों के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए। कर्मचारियों का कहना है कि ओपीएस को लेकर बार-बार नीति बदलने से कर्मचारियों में असमंजस और नाराजगी बढ़ रही है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अप्रैल 2023 में ओपीएस लागू किया था, जिसे मौजूदा सरकार ने अब पीछे खींच लिया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है — यह फैसला न केवल कर्मचारियों की उम्मीदों पर चोट है, बल्कि राज्य की नीति-स्थिरता पर भी सवाल उठाता है।