मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिल सकी। अदालत ने ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर उनकी कानूनी चुनौती भी सफल नहीं हो पाई। निर्वाचन आयोग पहले ही सीट पर मतदान और मतगणना की तारीखें घोषित कर चुका है।
दोषसिद्धि पर रोक लगाने की याचिका हुई खारिज
दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की उस याचिका को स्वीकार नहीं किया, जिसमें उन्होंने ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में हुई दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत के इस फैसले के बाद उन्हें तत्काल कोई कानूनी राहत नहीं मिली है। भारती ने अदालत से आग्रह किया था कि दोषसिद्धि पर रोक लगाई जाए ताकि उनके राजनीतिक अधिकार प्रभावित न हों।
तीन साल की सजा के बाद गई थी विधानसभा सदस्यता
ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने राजेंद्र भारती को तीन वर्ष की सजा सुनाई थी। हालांकि सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें ट्रायल कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, लेकिन दोषसिद्धि के चलते उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई। सदस्यता खत्म होने के बाद दतिया विधानसभा सीट रिक्त घोषित कर दी गई, जिस पर अब उपचुनाव कराया जा रहा है।
उपचुनाव की प्रक्रिया रोकने की भी थी मांग
राजेंद्र भारती ने अपनी याचिका में केवल दोषसिद्धि पर रोक लगाने की ही मांग नहीं की थी, बल्कि दतिया विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया पर भी रोक लगाने का अनुरोध किया था। उनका तर्क था कि यदि दोषसिद्धि प्रभावी रहती है तो वह चुनाव लड़ने के अपने अधिकार से वंचित हो जाएंगे। हालांकि अदालत ने उनकी इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
दतिया सीट पर घोषित हो चुका है चुनाव कार्यक्रम
दतिया विधानसभा सीट के लिए निर्वाचन कार्यक्रम पहले ही घोषित किया जा चुका है। तय कार्यक्रम के अनुसार 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। हाई कोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल उपचुनाव की प्रक्रिया पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी।
फैसले के बाद राजनीतिक गतिविधियों पर नजर
हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद दतिया उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है। राजेंद्र भारती के मामले में अदालत का फैसला आने के बाद अब सभी की नजर उपचुनाव की प्रक्रिया और आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद निर्वाचन प्रक्रिया में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है।