Rajesh Khanna Property Case : हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना की संपत्ति से जुड़ी कानूनी लड़ाई में अनीता आडवाणी को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया। अनीता ने दावा किया था कि राजेश खन्ना के साथ उनका रिश्ता शादी जैसा था। इसी आधार पर उन्होंने संपत्ति में हिस्सेदारी और रहने के लिए घर की मांग की थी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने उनकी याचिका पर सुनवाई की। इस फैसले से राजेश खन्ना के परिवार को राहत मिली है और अनीता की कानूनी लड़ाई को एक और झटका लगा है।
राजेश खन्ना के परिवार को मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट में अनीता आडवाणी ने राजेश खन्ना के परिवार के सदस्यों को भी पक्ष बनाया था। इनमें उनकी पत्नी डिंपल कपाड़िया, बेटी ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना शामिल थीं। अनीता ने अपने रिश्ते को कानूनी शादी का दर्जा देने की मांग की थी। इससे पहले मुंबई की दिंडोशी सिविल कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले में बदलाव करने से इनकार कर दिया है। इससे संपत्ति में हिस्सेदारी और घर पर अधिकार की उनकी मांग को कानूनी राहत नहीं मिल सकी।
2017 में सिविल कोर्ट ने खारिज किया था मुकदमा
अनीता आडवाणी ने राजेश खन्ना के साथ अपने रिश्ते को शादी जैसा बताते हुए संपत्ति में हिस्सा और रहने के लिए घर मांगा था। मुंबई की दिंडोशी सिविल कोर्ट ने 2017 में उनका मुकदमा खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि राजेश खन्ना के निधन के समय डिंपल कपाड़िया के साथ उनका कानूनी विवाह कायम था। ऐसे में हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अनीता के रिश्ते को कानूनी शादी मानने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस फैसले को अनीता ने चुनौती दी, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने 1 अप्रैल 2026 को उनकी अपील खारिज कर दी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है।
2012 में राजेश खन्ना के निधन के बाद शुरू हुआ विवाद
राजेश खन्ना का जुलाई 2012 में निधन हो गया था। इसके बाद अनीता आडवाणी ने दावा किया कि वह कई साल तक उनके साथ मुंबई के बांद्रा स्थित ‘आशीर्वाद’ बंगले में लिव-इन रिलेशनशिप में रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि अभिनेता की मौत के बाद उन्हें बंगले से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने राजेश खन्ना के परिवार के खिलाफ घरेलू हिंसा से जुड़ी कानूनी कार्रवाई भी शुरू की। संपत्ति और रिश्ते को लेकर शुरू हुआ यह विवाद सालों तक अदालतों में चलता रहा। अनीता का कहना था कि उनका रिश्ता केवल सामान्य परिचय तक सीमित नहीं था, बल्कि शादी जैसा था।
घरेलू हिंसा मामले में भी नहीं मिली राहत
अनीता आडवाणी की ओर से दाखिल घरेलू हिंसा मामले की कार्यवाही भी 2015 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने रद्द कर दी थी। उस समय अदालत ने कहा था कि अनीता और राजेश खन्ना का रिश्ता घरेलू हिंसा कानून, 2005 के तहत ‘शादी की प्रकृति’ वाले रिश्ते की श्रेणी में नहीं आता। इस फैसले के बाद भी अनीता ने संपत्ति और रिश्ते को लेकर कानूनी लड़ाई जारी रखी। राजेश खन्ना के निधन के बाद उनका बंगला ‘आशीर्वाद’ भी बेच दिया गया। इसके बावजूद संपत्ति में हिस्सेदारी और रिश्ते की कानूनी मान्यता का विवाद लंबे समय तक चर्चा में बना रहा।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कानूनी लड़ाई को झटका
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अनीता आडवाणी को इस मामले में राहत पाने की एक और कोशिश में नाकामी मिली है। अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बदलने से इनकार कर दिया। अनीता की मांग थी कि राजेश खन्ना के साथ उनके रिश्ते को शादी का दर्जा दिया जाए और उन्हें संपत्ति में हिस्सा तथा रहने के लिए घर मिले। लेकिन निचली अदालत, हाई कोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के कारण उनकी मांग स्वीकार नहीं हुई। इस फैसले से राजेश खन्ना के परिवार को राहत मिली है और लंबे समय से चल रहे विवाद का यह एक अहम कानूनी पड़ाव बन गया है।