मध्य प्रदेश में ठंड ने इस साल उम्मीद से पहले दस्तक दे दी है। अक्टूबर की शुरुआत में ही तापमान रिकॉर्ड स्तर तक नीचे चला गया है। राजगढ़ जिला 13.5 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका बन गया, जिसने पचमढ़ी जैसे हिल स्टेशन को भी पीछे छोड़ दिया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश के अधिक होने से जमीन में नमी बढ़ी, जिससे ठंड ने समय से पहले अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है।
राजगढ़ ने तोड़ा 10 साल पुराना रिकॉर्ड
राजगढ़ में शनिवार को न्यूनतम तापमान 13.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे कम है। इससे पहले अक्टूबर 2020 में तापमान 19.4 डिग्री तक गिरा था। इस बार ठंड ने उस रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार औसत से 388 मिमी अधिक वर्षा होने के कारण वातावरण में नमी बढ़ी, जिससे तापमान में तेज गिरावट दर्ज की जा रही है।
खेती के लिए फायदेमंद, सेहत के लिए चुनौती
जहां किसानों के लिए यह ठंड वरदान साबित हो रही है, वहीं आमजन के लिए परेशानी का कारण बन रही है। ठंडक से फसलों में रोग कम होने और नमी बढ़ने से रबी की फसल की बुआई के लिए अच्छा मौसम बन गया है। लेकिन दूसरी ओर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर इसका असर दिखाई देने लगा है।
ओपीडी में बढ़ी मरीजों की संख्या
राजगढ़ जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ गई है। पहले जहां रोजाना 100 बच्चों तक की जांच होती थी, अब यह आंकड़ा 200 से ज्यादा पहुंच गया है। वहीं 50 वर्ष से अधिक आयु वाले 300 से अधिक बुजुर्ग सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. चंदा दांगी ने बताया कि "अचानक मौसम बदलने से बच्चे वायरल की चपेट में आ रहे हैं। माता-पिता को चाहिए कि मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं और डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।”
आने वाले दिनों में बढ़ेगी ठंड की रफ्तार
मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट दर्ज होगी। रातें और ठंडी होंगी, खासकर उत्तर और मध्य हिस्सों में। वहीं भोपाल, जबलपुर और इंदौर में भी अगले एक सप्ताह के भीतर ठंड का असर स्पष्ट रूप से दिखेगा।