मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में पदस्थ एक महिला डॉक्टर को ट्रांसफर के बाद व्हाट्सएप पर डाला गया एक स्टेटस महंगा पड़ गया। जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा सिंह ने ट्रांसफर के बाद सोशल मीडिया पर जो भावनात्मक स्टेटस डाला, उसे अनुशासनहीनता और सरकारी कर्मचारी के आचरण के विरुद्ध माना गया। यह मामला इतना बढ़ा कि स्थानीय विधायक अमर सिंह यादव ने इसे स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंचा दिया। मंत्री से शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उनका मुख्यालय अब खरगोन बनाया गया है। बताया जा रहा है कि स्टेटस में भले किसी का नाम न हो, लेकिन भाषा और लहजा विवादास्पद था। डॉक्टर के खिलाफ पहले से ही लापरवाही के आरोप लगे थे, जो अब निलंबन में तब्दील हो गए।
व्हाट्सएप स्टेटस से शुरू हुआ विवाद
राजगढ़ जिला अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर आकांक्षा सिंह का स्थानांतरण 16 मई 2025 को नीमच कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर लिखा –
"याद रहे स्वयं के व्यय पर और अपनी मनचाही जगह पर... पीछा छूटा..."
साथ ही नोट में जोड़ा –
"लेटर हेड पर जिन आदरणीय ने उछल-उछलकर लिख दिया था कि हमारा ट्रांसफर कर दिया जाए, वह अपनी एप्लिकेशन डस्टबिन से उठा लें..."
यह स्टेटस सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और सीधे विधायक अमर सिंह यादव तक पहुंच गया।
विधायक ने बताया स्टेटस को अनुशासनहीन
राजगढ़ विधायक अमर सिंह यादव ने इसे एक "government servant" के अनुशासन के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को इस तरह से निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। भोपाल में स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर उन्होंने डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। मंत्री से मिलने के बाद ही विभाग ने तुरंत डॉक्टर को "suspend" कर दिया।
पुराने विवाद भी बने वजह
डॉ. आकांक्षा सिंह के खिलाफ पहले भी शिकायतें आ चुकी थीं। कुछ महीने पहले प्रसव के दौरान लापरवाही को लेकर मरीजों ने विरोध जताया था। इस पर SDM और Deputy Collector ने अस्पताल पहुंचकर जांच की थी। विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर उनके ट्रांसफर की मांग की थी।
सरकारी सेवा में सोशल मीडिया का असर
इस घटना ने यह साफ कर दिया कि सरकारी सेवकों के लिए सोशल मीडिया अब एक गंभीर मसला बन गया है। "Emotional outburst", "public comments" और "unofficial communication" अब सेवा शर्तों के खिलाफ माना जा रहा है। ऐसे में कर्मचारी यदि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिक्रिया दें, तो वह अनुशासनात्मक कार्रवाई की वजह बन सकती है।