भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 7 से 10 अक्टूबर 2025 तक ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह पिछले 12 वर्षों में किसी भारतीय रक्षा मंत्री की पहली ऑस्ट्रेलिया यात्रा होगी। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। राजनाथ सिंह की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में और मजबूत हो रहे हैं।
12 साल बाद हो रहा है बड़ा रक्षा दौरा
भारतीय रक्षा मंत्री की पिछली ऑस्ट्रेलिया यात्रा साल 2013 में तत्कालीन मंत्री एके एंथनी ने की थी। राजनाथ सिंह की यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास का संकेत है। इस दौरान वे ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री और उप प्रधानमंत्री रिचर्ड मार्लेस से मुलाकात करेंगे और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के नए आयामों पर चर्चा करेंगे।
फोकस होगा रक्षा तकनीक और समुद्री सुरक्षा पर
भारत और ऑस्ट्रेलिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मैरिटाइम सिक्योरिटी और रक्षा तकनीक के साझा विकास पर काम कर रहे हैं। इस दौरे में दोनों पक्ष ऑपरेशनल डिफेंस कोऑपरेशन को बढ़ाने के लिए नई साझेदारियां कर सकते हैं। भारत ने पहले ही ऑस्ट्रेलिया के साथ इंडो-पैसिफिक में समुद्री क्षेत्र जागरूकता और सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने पर सहमति जताई है।
2020 के बाद से बढ़ा रणनीतिक तालमेल
साल 2020 में दोनों देशों ने विस्तृत रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) की शुरुआत की थी। इसके बाद 2021 में म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट (MLSA) पर हस्ताक्षर हुए, जिससे नौसेना और वायुसेना के बीच सहयोग और सशक्त हुआ। 2023 में भारतीय पनडुब्बी का ऑस्ट्रेलिया के पर्थ दौरा और इंडोनेशिया के साथ त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यास इस गहराते संबंध का प्रमाण है।
इंडो-पैसिफिक में भारत की अहम भूमिका
ऑस्ट्रेलिया भारत को इंडो-पैसिफिक सुरक्षा तंत्र में एक मुख्य रणनीतिक सहयोगी के रूप में देखता है। वहीं भारत, प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के प्रयास में है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच क्वाड समूह के भीतर सहयोग को भी और मजबूत कर सकती है।
व्यापार और गतिशीलता में भी साझेदारी
रक्षा के अलावा भारत और ऑस्ट्रेलिया व्यापार, माइग्रेशन और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों देश हॉलीडे वीजा प्रोग्राम और मोबिलिटी पार्टनरशिप जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों के बीच आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं।