मध्य प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। एक विधायक की सदस्यता समाप्त होने और अन्य विधायकों की स्थिति अनिश्चित होने से मुकाबला अब पहले से ज्यादा दिलचस्प हो गया है। खासकर तीसरी सीट को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीतियां बदल रही हैं, जिससे चुनावी गणित पूरी तरह उलझता दिख रहा है।
राज्यसभा चुनाव की टाइमिंग और सीटों का गणित
मध्य प्रदेश में मई-जून के बीच तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने की संभावना है। अप्रैल में दो सत्ताधारी दल और एक विपक्षी दल के सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में तीनों सीटों पर नए प्रतिनिधियों के चयन के लिए मतदान कराया जाएगा।
सदस्यता खत्म होने से बदला समीकरण
दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने का सीधा असर चुनावी गणित पर पड़ा है। इसके अलावा एक अन्य विधायक के वोटिंग अधिकार पर रोक है, जिससे विपक्षी दल की स्थिति कमजोर होती नजर आ रही है। इन घटनाओं ने राज्यसभा चुनाव को साधारण से जटिल बना दिया है।
विधायकों की संख्या और बदलती स्थिति
प्रदेश में कुल 230 विधायकों में से अब प्रभावी संख्या 228 रह गई है। सत्ताधारी दल के पास 164 विधायक हैं, जबकि विपक्ष के पास 65 विधायक हैं। लेकिन इनमें भी एक विधायक वोट नहीं डाल पाएंगे और एक की सदस्यता जा चुकी है। वहीं एक अन्य विधायक के रुख को लेकर असमंजस बना हुआ है।
क्रॉस वोटिंग और तीसरी सीट पर रोमांच
राजनीतिक हलकों में क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। यदि कुछ विधायक पक्ष बदलते हैं या मतदान से दूर रहते हैं, तो तीसरी सीट का मुकाबला बेहद रोमांचक हो सकता है। माना जा रहा है कि सत्ताधारी दल तीसरा उम्मीदवार उतारकर समीकरण अपने पक्ष में करने की तैयारी में है।
छोटी पार्टियों की भूमिका भी अहम
एक विधायक भारतीय आदिवासी पार्टी से भी है, जो अपना उम्मीदवार उतारने की बात कर रहे हैं। ऐसे में छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। कुल मिलाकर राज्यसभा चुनाव का यह मुकाबला अब पूरी तरह खुला और दिलचस्प बन गया है।