Raksha Bandhan 2026: इस बार रक्षाबंधन का पर्व एक खास खगोलीय घटना के बीच मनाया जाएगा। 28 अगस्त 2026 को साल का अंतिम चंद्र ग्रहण लगेगा और इसी दिन श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर भाई-बहन के प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन भी मनाया जाएगा। हालांकि इस ग्रहण को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा। ज्योतिषाचार्य पंडित शैलेंद्र पांडे के मुताबिक, 28 अगस्त को लगने वाला ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण होगा। इसकी शुरुआत सुबह 6:53 बजे होगी और दोपहर 12:31 बजे तक यह समाप्त हो जाएगा। ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगने की बात कही गई है। चूंकि यह घटना भारत में नजर नहीं आएगी, इसलिए यहां इसके लिए सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में रक्षाबंधन के त्योहार और राखी बांधने की परंपरा पर भी इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें?
चंद्र ग्रहण के दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान का स्मरण और मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। इस समय ध्यान, स्तुति या धार्मिक पाठ भी किया जा सकता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करने की परंपरा है। इसके बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को दान करना शुभ माना जाता है। खासतौर पर चंद्रमा से जुड़ी वस्तुएं जैसे दूध, दही, चावल, चीनी और चांदी का दान किया जा सकता है। वहीं, जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर माना जाता है, वे ग्रहण के दौरान 'ॐ सों सोमाय नमः' या 'ॐ चंद्राय नमः' मंत्र का जाप कर सकते हैं।
भारत में ग्रहण नहीं दिखेगा तो क्या नहीं करना चाहिए?
भारत में यह चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देने वाला है, इसलिए यहां ग्रहण से जुड़े सामान्य प्रतिबंध लागू नहीं माने जाएंगे। ऐसे में लोगों को अपने रोजमर्रा के काम या दिनचर्या में किसी तरह का बदलाव करने की जरूरत नहीं है। ग्रहण के नाम पर खाना-पीना छोड़ने या सूतक मानकर भोजन पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। मंदिरों के कपाट भी बंद करने की जरूरत नहीं है और लोग सामान्य दिनों की तरह मंदिर जाकर पूजा-पाठ कर सकते हैं। इसके अलावा सोने-जागने की दिनचर्या बदलने की भी कोई जरूरत नहीं है। गर्भवती महिलाओं को भी इसे लेकर घबराने या किसी विशेष तरह की पाबंदी रखने की आवश्यकता नहीं है, वे सामान्य रूप से अपने जरूरी काम कर सकती हैं।
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रक्षाबंधन पर ग्रहण का क्या पड़ेगा असर?
28 अगस्त को चंद्र ग्रहण और रक्षाबंधन एक ही दिन पड़ रहे हैं, लेकिन भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण इसका पर्व पर कोई धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा। इसलिए बहनें शुभ समय देखकर अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। रक्षाबंधन पर राखी बांधने का सबसे अच्छा समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है। इसके अलावा दोपहर में 12:05 बजे से 1:05 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भी राखी बांधी जा सकती है। इसलिए रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण की खबर को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। भारत में ग्रहण दिखाई न देने के कारण यहां सामान्य धार्मिक नियमों के मुताबिक सूतक या अन्य पाबंदियां लागू नहीं होंगी और भाई-बहन सामान्य तरीके से यह त्योहार मना सकेंगे।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।