Indian Cricket Sisters : रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार नहीं, बल्कि त्याग और भरोसे की मिसाल भी है। टीम इंडिया के दो बड़े नाम रवींद्र जडेजा और भुवनेश्वर कुमार इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं। आज दोनों खिलाड़ियों ने मिलकर इंटरनेशनल क्रिकेट में 936 विकेट लिए हैं और 8751 रन बनाए हैं, लेकिन उनकी इस सफलता के पीछे दो बहनों का संघर्ष और भरोसा छिपा है। अगर उन बहनों ने मुश्किल समय में साथ नहीं दिया होता, तो शायद भारतीय क्रिकेट को ये दो बड़े मैच विनर नहीं मिलते।
जब बहन ने पहचानी भुवी की प्रतिभा
मेरठ के रहने वाले भुवनेश्वर कुमार का सपना क्रिकेट था, लेकिन परिवार उन्हें एक सुरक्षित करियर की ओर बढ़ते देखना चाहता था। ऐसे समय में उनकी बड़ी बहन रेखा अडाना ने उनके अंदर छिपे हुनर को पहचाना। उन्होंने सिर्फ 13 साल की उम्र में भुवनेश्वर को क्रिकेट मैदान तक पहुंचाया और कोचों से मिलवाया। यही वह कदम था जिसने भुवनेश्वर के क्रिकेट सफर की नींव रखी। बाद में वही लड़का दुनिया के सबसे बेहतरीन स्विंग गेंदबाजों में गिना जाने लगा।
संघर्षों के बीच बना स्विंग का सितारा
भुवनेश्वर कुमार ने अपने करियर में भारत के लिए कई यादगार प्रदर्शन किए। लेकिन वह अक्सर अपनी सफलता का श्रेय बहन रेखा को देते हैं। उनका मानना है कि अगर बहन उस समय उनका साथ नहीं देतीं, तो शायद वह क्रिकेट की दुनिया तक पहुंच ही नहीं पाते। परिवार को मनाने से लेकर शुरुआती दिनों में हौसला बढ़ाने तक, रेखा हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहीं।
मां के जाने के बाद टूट गए थे जडेजा
रवींद्र जडेजा की कहानी और भी भावुक है। किशोर उम्र में ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था। इस घटना ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया और उन्होंने क्रिकेट छोड़ने तक का मन बना लिया था। परिवार पर भी मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा था। ऐसे समय में उनकी बड़ी बहन नैना जडेजा ने घर और भाई दोनों की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने जडेजा को हार नहीं मानने दी और लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
बहन की हिम्मत से बदली जिंदगी
मां के निधन के कुछ ही दिनों बाद जब जडेजा को अंडर-19 कैंप का बुलावा मिला, तब नैना ने उन्हें फिर मैदान में लौटने का हौसला दिया। उन्होंने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां भी संभालीं ताकि जडेजा अपने खेल पर ध्यान दे सकें। यही भरोसा आगे चलकर जडेजा के करियर की सबसे बड़ी ताकत बना। आज वह दुनिया के सबसे सफल ऑलराउंडरों में गिने जाते हैं।
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भारतीय क्रिकेट को मिले दो मैच विनर
एक तरफ भुवनेश्वर कुमार ने अपनी स्विंग गेंदबाजी से दुनिया भर के बल्लेबाजों को परेशान किया, तो दूसरी तरफ रवींद्र जडेजा ने बल्ले और गेंद दोनों से टीम इंडिया को कई मैच जिताए। इन दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों के पीछे उनकी मेहनत जरूर है, लेकिन उनकी बहनों का योगदान भी उतना ही बड़ा है। रक्षाबंधन के मौके पर यह कहानी याद दिलाती है कि कई बार किसी खिलाड़ी की सफलता के पीछे मैदान के बाहर खड़े लोगों का त्याग सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।