रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और सुरक्षा का प्रतीक त्योहार है, जो हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राखी बांधने के बाद इसे कब उतारना उचित है? अलग-अलग परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राखी उतारने के नियम अलग होते हैं। आइए जानते हैं राखी उतारने का सही समय और इसके पीछे का महत्व।
जन्माष्टमी तक बांधने की परंपरा
कुछ धार्मिक मान्यताओं में राखी को जन्माष्टमी तक कलाई पर बांधे रखने की परंपरा है। माना जाता है कि श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव तक यह भाई की रक्षा कवच के रूप में कार्य करती है और उसे हर प्रकार के संकट से बचाती है।
16 दिनों का नियम
ज्योतिष के अनुसार राखी को पूर्णिमा से अगले 15 दिनों तक कलाई पर रखना शुभ माना जाता है। 16वें दिन इसे बहते जल में विसर्जित करने से भाई की आयु, सफलता और समृद्धि में वृद्धि होती है। इस परंपरा में राखी केवल प्रेम का प्रतीक नहीं, बल्कि सौभाग्य और रक्षा का सूत्र भी मानी जाती है।
दशहरे तक बांधने की मान्यता
कुछ जगहों पर राखी को दशहरे तक बांधकर रखने की प्रथा है। विजयादशमी के दिन अच्छाई की बुराई पर विजय का पर्व मनाया जाता है, और तब तक राखी भाई को हर प्रकार के नकारात्मक प्रभाव से बचाती है।
राखी बांधते समय तीन गांठ का महत्व
राखी बांधते समय पारंपरिक रूप से तीन गांठ लगाई जाती हैं—पहली भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए, दूसरी प्रेम और विश्वास के लिए, और तीसरी भाई को अपने कर्तव्यों की याद दिलाने के लिए।