
रक्षाबंधन 2025: रक्षाबंधन, भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक पर्व, वर्ष 2025 में 9 अगस्त (शनिवार) को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना करती हैं, जबकि भाई उन्हें जीवन भर सुरक्षा देने का वचन देते हैं। यह पर्व भारतीय संस्कृति में आत्मीय संबंधों की मिठास और पारिवारिक मूल्यों को उजागर करता है।
रक्षाबंधन का महत्व
राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि भावनाओं, कर्तव्यों और रिश्तों की डोर होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की कलाई से खून बहते समय अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधा था, जिसे भगवान ने राखी के रूप में स्वीकार किया और जीवनभर उसकी रक्षा करने का वचन दिया। तब से यह पर्व भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते का प्रतीक बन गया।
राखी कितने दिन तक रखनी चाहिए?
अक्सर यह सवाल उठता है कि राखी को कितने दिनों तक कलाई पर बांधे रखना उचित होता है? धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो राखी को कम से कम सप्ताहभर यानी सात दिन तक कलाई पर बांधकर रखना शुभ माना जाता है। यह इस बात का प्रतीक होता है कि भाई अपनी बहन के प्रेम, आशीर्वाद और रक्षा-संकेत को दिल से स्वीकार कर रहा है। हालांकि कुछ परंपराओं में राखी को श्रावण पूर्णिमा से लेकर कृष्ण जन्माष्टमी तक (जो इस साल 16 अगस्त 2025 को है) बांधकर रखना भी शुभ माना गया है। इसके पीछे मान्यता है कि रक्षा सूत्र जब तक कलाई पर रहता है, तब तक नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और भाई का भाग्य प्रबल बना रहता है।
राखी उतारने की सही विधि
जब राखी उतारी जाए, तो उसे सम्मानपूर्वक किसी पीपल या तुलसी के पेड़ के पास बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए या फिर मंदिर में रखें। इसे फेंकना अपशकुन माना जाता है क्योंकि यह एक पवित्र वस्तु होती है।
भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक
रक्षाबंधन 2025 न केवल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है, बल्कि यह पर्व उन मूल्यों को भी मजबूत करता है जो हमारे समाज और संस्कृति की नींव हैं। राखी को प्रेम, आशीर्वाद और सुरक्षा का प्रतीक मानकर उसका सम्मान करें और उसे यथासंभव कुछ दिनों तक कलाई पर रखें।