
Rakshabandhan 2025: सूत्र के कई अर्थ हैं। सूत्र यानी धागा, सूत्र यानी सेवई, सूत्र यानी फार्मूला या गणित, सूत्र यानी वेद सार, सूत्र यानी जीवन मंत्र, सूत्र यानी प्रेम। ये सभी ब्रह्म सूत्र में समाहित होते हैं। इसलिए हाथ में कलावा या मौली बांधा जाता है। ब्रह्म सूत्र का अपना महत्व है। रक्षाबंधन का व्रत नहीं होता। यह आनंद और प्यार का पर्व है। परिवार को बांधने का सूत्र यानी बंधन है। रक्षा कवच है। आपको बताद दें कि राखी पूर्व या उत्तर दिशा में बांधनी चाहिए। अब दिशा का ज्ञान नहीं रखते।
क्या करना चाहिए ?
प्रारंभ में पांच राखी देवों को चढ़ती हैं यथा गुरु, ईष्ट, हनुमान जी, शिव और भगवती। इनकी पूजा होती है। भाई की राखी का भी पहले पूजन होता था। फिर बांधी जाती थी। चूंकि कलावा की राखी होती थी। इसलिए यह काफी समय तक बंधी रहती थी। बिना सिर ढके तिलक नहीं होता। न राखी बांधनी चाहिए। यह संकल्प और आशीर्वाद का प्रतीक है।
बंधनमुक्त होता है राखी का त्योहार
राखी बंधन मुक्त है। इस पर्व को भगवान ने ही किसी बंधन में नहीं रखा व्रत, उपवास, कथा, मुहूर्त आदि। द्वार पर सोहन रखना। ये पांच या सात या नौ रखे जाते हैं। उद्देश्य यह है कि सभी जगह धर्म, अध्यात्म, सुख, शांति और यश कीर्ति हो।
विशेष बात
राखी सूर्य भगवान के उत्कर्षकाल में बांधनी चाहिए। यानी मेरे भाई की कीर्ति उत्कर्ष पर पहुंचे। उसका तेज प्रखर हो। यह पर्व भगवती का भी प्रतीक है। भगवती की पूजा भी सूर्य नारायण के उत्कर्ष काल में अति श्रेष्ठ मानी गई है।