राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट से पहले ही तत्कालीन महासचिव चंपत राय को चोरी की जानकारी मिल चुकी थी। उनके मुताबिक, शुरुआत में चंपत राय ने मामले को व्यक्तिगत स्तर पर सुलझाने की कोशिश की, लेकिन जब लगा कि मामला गंभीर है और अकेले हल नहीं हो सकता, तब एसआईटी जांच की मांग की गई। उन्होंने कहा कि इसी के बाद जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
एफआईआर में हुई देरी पर क्या बोले?
गोविंद देव गिरी ने स्वीकार किया कि मामले में एफआईआर दर्ज कराने में देरी हुई। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट इस बात को लेकर असमंजस में था कि शिकायत कौन करे और किस स्तर पर कार्रवाई शुरू की जाए। इसी वजह से समय पर कानूनी प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। उन्होंने इसे एक प्रकार की असावधानी बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि किसी को बचाने की कोशिश नहीं की गई। उनके अनुसार, मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया गया।
चंपत राय का किया बचाव
कोषाध्यक्ष ने चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि उनके खिलाफ किसी तरह की गलत मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि चंपत राय लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं और उनकी छवि निष्कलंक रही है। गोविंद देव गिरी के मुताबिक, उनकी सबसे बड़ी गलती यह रही कि उन्होंने कुछ लोगों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा कर लिया। उन्होंने कहा कि इसी भरोसे का गलत फायदा उठाया गया, जिससे यह पूरा विवाद सामने आया। हालांकि ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।
इसे भी पढ़ें : IND vs ENG: तीसरे T20 में भारत की वापसी की चुनौती, आज Vaibhav Suryavanshi पर रहेंगी सबकी नजरें
इस्तीफे के सवाल पर नाराज हुए
बातचीत के दौरान जब गोविंद देव गिरी से उनकी जिम्मेदारी और संभावित इस्तीफे को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हुंडियों की गिनती और नकदी प्रबंधन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, इसलिए इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने दोहराया कि उनकी जिम्मेदारी वित्तीय निगरानी तक सीमित है। वहीं ट्रस्ट ने अब व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नए प्रशासनिक ढांचे, बेहतर निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई बदलावों पर काम किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।