Ram Mandir Donation Theft Case : अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि अब इस मामले की आगे की सुनवाई अयोध्या की निचली अदालत में होगी। याचिकाकर्ताओं को मुकदमे की सुनवाई के दौरान अपनी बात रखने और अदालत की कार्यवाही में सहायता करने की छूट दी गई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में लगे आरोपों की सच्चाई पर कोई टिप्पणी नहीं की है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि विशेष जांच दल यानी एसआईटी इस मामले में निचली अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर चुका है।
एसआईटी दाखिल कर चुकी है आरोपपत्र
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि दूसरी एसआईटी ने 25 सितंबर तक अपनी जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल कर दिया था। इससे पहले 23 जून को पहली एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अप्रैल से 5 जून के बीच सीसीटीवी में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं दर्ज हुई थीं। फुटेज में आठ आरोपी नोटों की गड्डियां जेब और जूतों में छिपाते दिखाई दिए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दूसरी एसआईटी बनाई गई थी, जिसने मामले की जांच की।
दूसरी एसआईटी बनाने की क्यों पड़ी जरूरत?
चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में चार अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इनमें जांच सीबीआई को सौंपने और मंदिर में दान के प्रबंधन की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई थी। पहले जांच दल को राज्य सरकार के स्तर पर रिपोर्ट देनी थी, जबकि दूसरी एसआईटी को सीधे सुप्रीम कोर्ट में जांच की स्थिति बताने की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच में पुलिस अधिकारियों की भूमिका को अहम मानते हुए डीआईजी और एसएसपी स्तर के अधिकारियों को भी इसमें शामिल किया गया था।
चार याचिकाकर्ताओं ने उठाए थे सवाल
जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया था। याचिका दाखिल करने वालों में आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह, वकील एनके गोस्वामी, अजय कुमार राय और हिंदू धर्म परिषद शामिल हैं। याचिकाओं में सीबीआई जांच के साथ मंदिर ट्रस्ट के पैसों का पूरा ऑडिट कराने और दान के प्रबंधन से जुड़े मामलों की समीक्षा की मांग की गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुकदमे की सुनवाई अयोध्या की अदालत में होगी।
25 जून को आठ लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी एफआईआर
रामजन्मभूमि थाने में 25 जून को आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र के नाम शामिल हैं। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपियों पर चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति छिपाने और आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। सभी आरोपी फैजाबाद जेल में बंद बताए गए हैं।
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पुलिस ने बताई आरोपियों की अलग-अलग भूमिका
पुलिस के मुताबिक, रामशंकर यादव के पास बिना औपचारिक आदेश के दानपात्रों की चाबियां थीं। अनुकल्प मिश्र और लवकुश मिश्र नकदी की गिनती से जुड़े थे। पुलिस का दावा है कि अनुकल्प के घर से करीब 20 लाख रुपये और लवकुश के घर से करीब 10 लाख रुपये बरामद हुए। वहीं, अविनाश शुक्ल के बैंक खाते से पांच लाख रुपये की रकम बरामद किए जाने की बात कही गई है। पुलिस ने बाकी आरोपियों को भी नकदी की गिनती से जुड़ा बताया है। अब इन सभी आरोपों पर अयोध्या की निचली अदालत में सुनवाई होगी।