अयोध्या के भव्य श्री राम मंदिर में 25 नवंबर 2025 को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने वाला है। इस दिन मंदिर के शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘धर्म ध्वज’ फहराया जाएगा। खास बात यह है कि ध्वजारोहण के लिए जिस समय का चयन किया गया है, वह है अत्यंत शुभ ‘अभिजीत मुहूर्त’। माना जाता है कि महाभारत के दौरान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इसी मुहूर्त में युद्ध आरंभ करने का आदेश दिया था।
अभिजीत मुहूर्त क्या है?
ज्योतिष शास्त्र में दिन को कई शुभ-अशुभ समयखंडों में बांटा जाता है। इनमें ‘अभिजीत मुहूर्त’ को सर्वोत्तम माना जाता है। यह सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच का आठवां भाग होता है, जिसकी अवधि लगभग 48 मिनट की होती है। इसे स्वयं-सिद्ध और दोषमुक्त मुहूर्त कहा गया है, जो हर कार्य में सफलता का आश्वासन देता है।
विजय का प्रतीक माना जाता है यह समय
‘अभिजीत’ का अर्थ है—विजयी। यह मुहूर्त नकारात्मक शक्तियों को परास्त करने वाला माना जाता है। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत, जैसे गृह प्रवेश, व्यवसाय आरंभ या धार्मिक अनुष्ठान, इस मुहूर्त में करने से सफलता मिलने की मान्यता है।
श्रीकृष्ण ने भी चुना था यही मुहूर्त
महाभारत कथा में वर्णन है कि युद्ध आरंभ करने के सही समय को लेकर कई मत थे। तब भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के विजय सुनिश्चित करने हेतु अभिजीत मुहूर्त में अर्जुन को युद्ध शुरू करने का आदेश दिया। पांडवों की विजय इस मुहूर्त की शक्ति को प्रमाणित करती है।
राम मंदिर ध्वजारोहण के लिए क्यों चुना गया यह मुहूर्त?
राम मंदिर का निर्माण करोड़ों लोगों की आस्था और लंबे संघर्ष का प्रतीक है। ऐसे पावन अवसर पर ध्वजारोहण के लिए सबसे शुभ और विजयदायी समय का चयन किया गया है। यह मुहूर्त मंदिर की ऊर्जा और आध्यात्मिकता को और अधिक प्रबल बनाने वाला माना जाता है।
राम जन्म से भी जुड़ा है यह समय
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म भी अभिजीत मुहूर्त में हुआ था। यही कारण है कि उनके मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहराने के लिए यह मुहूर्त अत्यंत भावनात्मक और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।