अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच अब बड़े मोड़ पर पहुंच गई है। तीन सदस्यीय SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट एडिशनल चीफ सेक्रेटरी होम संजय प्रसाद तक पहुंच चुकी है और अब अंतिम फैसले की नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर है। सूत्रों के मुताबिक करीब 150 पन्नों की इस रिपोर्ट में लगभग 150 लोगों से पूछताछ का ब्योरा दर्ज है। रिपोर्ट गोपनीय है लेकिन इसमें सामने आए कुछ नामों और जिम्मेदारियों ने मंदिर प्रबंधन से लेकर प्रशासन तक हलचल बढ़ा दी है। हालांकि जांच अभी जारी है और किसी व्यक्ति को दोषी मानने का अंतिम फैसला कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
चढ़ावे की गिनती से बैंक तक हर कड़ी जांची गई
SIT ने अपनी पड़ताल में सिर्फ दानपात्र से रकम निकलने की प्रक्रिया नहीं देखी बल्कि पूरा सिस्टम खंगाला है। नकदी की गिनती कौन करता था। सोने चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं का रिकॉर्ड किसके पास रहता था। दानपात्र से निकली रकम बैंक तक किस रास्ते से पहुंचती थी। बैंक जमा की पर्चियां और मंदिर के रिकॉर्ड आपस में मिलते हैं या नहीं। इन सभी सवालों के जवाब तलाशे गए हैं। जांच टीम ने यह भी देखा कि गिनती करने वाले कर्मचारियों का चयन कैसे होता था और उनकी जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास थी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निगरानी व्यवस्था में कोई ऐसी कमी थी जिसका फायदा उठाया जा सकता था।
रिपोर्ट में कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल
सूत्रों के मुताबिक SIT की शुरुआती रिपोर्ट में कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति किए जाने की बात भी सामने आई है। इसका मतलब यह है कि रिपोर्ट में ऐसे बिंदु मिले हैं जिनकी आगे कानूनी जांच जरूरी मानी जा रही है। हालांकि अभी तक किसी कर्मचारी का नाम आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है। रिपोर्ट में जिन लोगों की जिम्मेदारी और भूमिका पर सवाल हैं उनके बारे में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही निकलेगा। जांच एजेंसियां अब दस्तावेजों बैंक रिकॉर्ड सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों के बयानों को आपस में मिलाकर देख सकती हैं ताकि किसी भी कार्रवाई से पहले हर तथ्य साफ हो जाए।
चंपत राय और पदाधिकारियों से जुड़े सवाल भी रिपोर्ट में
SIT की जांच में मंदिर ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्था और पदाधिकारियों की जिम्मेदारी भी चर्चा में है। रिपोर्टों के अनुसार ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत प्रबंधन से जुड़े कई लोगों से जानकारी ली गई है। डॉ अनिल मिश्रा मंदिर प्रशासक गोपाल राव और चढ़ावे की व्यवस्था से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका पर भी सवाल पूछे गए हैं। लेकिन पूछताछ होना दोष साबित होने जैसा नहीं है। जांच टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि व्यवस्था बनाने और निगरानी करने की जिम्मेदारी किसकी थी। अगर कहीं रिकॉर्ड रखने में कमी रही या निगरानी कमजोर रही तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर तक जाती है।
SIT ने ट्रस्ट में बदलाव और ऑडिट की सिफारिश की
रिपोर्ट में सिर्फ कथित गड़बड़ी की जांच नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के सुझाव भी दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक SIT ने मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था में बदलाव और चढ़ावे के प्रबंधन को ज्यादा पारदर्शी बनाने की सिफारिश की है। पिछले पांच वर्षों में मंदिर को मिले दान का विस्तृत ऑडिट कराने की बात भी कही गई है। साथ ही मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर किसी वरिष्ठ सरकारी अधिकारी की नियुक्ति का सुझाव सामने आया है। कर्मचारियों की नई भर्ती निगरानी मजबूत करने और रिकॉर्ड व्यवस्था को डिजिटल बनाने जैसे उपायों पर भी विचार हो सकता है।
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योगी के फैसले पर टिकी अब सबकी नजर
अब सबसे अहम बात यह है कि SIT की शुरुआती रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ क्या फैसला लेते हैं। क्या कुछ कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज होगी। क्या मंदिर की आंतरिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा। क्या चढ़ावे की गिनती और बैंक जमा की पूरी प्रक्रिया नए नियमों के तहत चलेगी। और क्या रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले नामों की भूमिका पर आगे सख्त जांच होगी। फिलहाल सरकार ने साफ किया है कि यह अंतिम रिपोर्ट नहीं है और जांच आगे भी चलेगी। राममंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है इसलिए श्रद्धालुओं की मांग भी साफ है कि अगर कोई निर्दोष है तो उसका नाम साफ हो और अगर किसी ने चढ़ावे की व्यवस्था में गड़बड़ी की है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई जरूर हो।