अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 6 जुलाई को होने वाली बैठक अब बेहद अहम मानी जा रही है। राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के दिए गए इस्तीफों पर इसी बैठक में अंतिम फैसला लिया जाएगा। ट्रस्ट के बायलॉज के अनुसार दोनों के इस्तीफों पर निर्णय मतदान के जरिए होगा और उन्हें स्वीकार करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा।
बायलॉज के तहत होगी वोटिंग
सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के नियमों के अनुसार किसी पदाधिकारी को उसके पद और जिम्मेदारियों से मुक्त किया जा सकता है, लेकिन इससे उसकी ट्रस्ट की आजीवन सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं होती। यदि चंपत राय महासचिव पद से हटते हैं या डॉ. अनिल मिश्रा ट्रस्टी पद छोड़ते हैं, तब भी वे ट्रस्ट के आजीवन सदस्य बने रह सकते हैं। यही नियम अन्य पदाधिकारियों पर भी लागू होता है।
12 ट्रस्टियों की राय होगी अहम
वर्तमान में ट्रस्ट के कुल 14 सदस्यों में से दो सदस्य पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। ऐसे में आगामी बैठक में मौजूद 12 ट्रस्टियों की राय के आधार पर मतदान कराया जाएगा। दो-तिहाई बहुमत मिलने पर ही इस्तीफे स्वीकार किए जाएंगे, जिससे इस बैठक का महत्व और बढ़ गया है।
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चढ़ावा विवाद के बाद सौंपे थे इस्तीफे
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद के बाद चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने इस्तीफे ट्रस्ट को सौंप दिए थे। ट्रस्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही स्पष्ट किया गया कि दोनों के इस्तीफों पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की अगली बैठक में लिया जाएगा।
परिजनों ने आरोपों को बताया निराधार
चढ़ावा विवाद के बीच चंपत राय के परिवार और स्थानीय लोगों ने उनके समर्थन में सामने आकर सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि चंपत राय का पूरा जीवन सादगी, ईमानदारी और समाज सेवा के लिए समर्पित रहा है। परिवार का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जबकि अंतिम निर्णय अब ट्रस्ट की बैठक में होने वाली प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।