राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने इसकी पुष्टि की है। इससे पहले दिनभर इस्तीफों की चर्चा होती रही, लेकिन अब आधिकारिक पुष्टि के बाद मामला और गंभीर हो गया है। छह जून को सामने आए इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद कई अहम सिफारिशें की थीं।
एफआईआर के बाद जेल पहुंचे आरोपी
एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर राम जन्मभूमि थाने में कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। आरोपियों से लंबी पूछताछ के बाद करीब 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए। मेडिकल परीक्षण के बाद सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित गड़बड़ी का दायरा कितना बड़ा है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
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जांच के घेरे में कई नाम
मामले में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी स्वीकार किया कि दोनों ट्रस्टियों पर आरोप लगने के कारण उन पर दबाव है। वहीं निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, हालांकि उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने मीडिया में चल रही खबरों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।
जांच पूरी होने तक बढ़ेगा इंतजार
मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने साफ कहा है कि एसआईटी की जांच पूरी होने तक वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उनके मुताबिक अभी केवल प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी गई है और पूरी जांच जारी है। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।