Ramayana Movie Mistakes : फिल्म 'रामायण' को बड़े पर्दे पर देखने के लिए दर्शकों के बीच काफी उत्साह है। फिल्म में शानदार दृश्य, बड़े सेट और दमदार कलाकारों की मौजूदगी इसे खास बनाती है। लेकिन इतनी बड़ी फिल्म होने के बावजूद इसमें कुछ ऐसी बातें हैं, जो दर्शकों को खटक सकती हैं। रामायण की कहानी हर घर में सुनी और समझी गई है। ऐसे में जब इसे बड़े पर्दे पर दिखाया जाता है तो लोगों की उम्मीदें भी काफी बढ़ जाती हैं। फिल्म में कई जगह कहानी को जल्दी आगे बढ़ाने की कोशिश की गई है, जिससे कुछ जरूरी घटनाओं का असर कम होता नजर आता है।
रावण और भगवान शिव के रिश्ते को नहीं मिली जगह
रावण का किरदार सिर्फ उसकी ताकत और अहंकार के लिए ही नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति उसकी भक्ति के लिए भी जाना जाता है। रावण को भगवान शिव का बड़ा भक्त माना जाता है। उसने अपनी तपस्या और भक्ति से महादेव को प्रसन्न किया था। ऐसे में दर्शकों को उम्मीद थी कि फिल्म में रावण और भगवान शिव के इस खास रिश्ते को विस्तार से दिखाया जाएगा। लेकिन कहानी में इस पहलू को उतनी जगह नहीं मिलती, जितनी मिलनी चाहिए थी। इससे रावण के व्यक्तित्व का एक अहम हिस्सा अधूरा महसूस होता है।
कुंभकर्ण और दूसरे किरदारों पर कम ध्यान
रामायण की कहानी में कुंभकर्ण का किरदार भी काफी अहम है। वह सिर्फ रावण का भाई नहीं, बल्कि अपनी अलग सोच और ताकत के लिए भी जाना जाता है। इसी तरह विभीषण, मेघनाद और दूसरे किरदारों की भी अपनी खास भूमिका है। लेकिन फिल्म में कई किरदारों को उतना समय नहीं मिलता, जिससे दर्शक उनके स्वभाव और कहानी में उनके योगदान को अच्छी तरह समझ सकें। इतने बड़े विषय पर फिल्म बनाते समय हर जरूरी किरदार को सही जगह देना काफी अहम था।
शूर्पणखा के प्रसंग में भी दिखी कमी
शूर्पणखा का प्रसंग रामायण की कहानी को नया मोड़ देता है। इसी घटना के बाद रावण और राम के बीच टकराव की शुरुआत होती है। फिल्म में शूर्पणखा के किरदार को अलग नजरिए से दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन इस पूरे प्रसंग की भावनाओं और उसके आगे होने वाले असर को और बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था। इसके अलावा कुछ घटनाएं इतनी तेजी से आगे बढ़ती हैं कि दर्शकों को उनके पीछे की वजह समझने का पूरा मौका नहीं मिलता।
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भावनाओं से ज्यादा भव्यता पर रहा जोर
रामायण सिर्फ युद्ध, शक्तियों और बड़े दृश्यों की कहानी नहीं है। इसमें परिवार, रिश्ते, त्याग, वचन और धर्म जैसे कई पहलू जुड़े हैं। फिल्म में शानदार दृश्य जरूर हैं, लेकिन कुछ जगह भावनात्मक हिस्सों को और समय देने की जरूरत महसूस होती है। राम और सीता का रिश्ता, लक्ष्मण का भाई के प्रति समर्पण और दशरथ का पुत्र प्रेम ऐसे प्रसंग हैं, जिन्हें दर्शक दिल से महसूस करना चाहते हैं। यही वजह है कि फिल्म की भव्यता के साथ कहानी की गहराई पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी था।