Rambhadracharya Termed: धार्मिक जगत में चल रहे विवाद के बीच जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपने और तुलसी पीठ से जुड़े आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से प्रसारित उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें उनके उत्तराधिकारी और संस्थान से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने इसे तुलसी पीठ की छवि धूमिल करने की साजिश बताया।
आरोपों को बताया अफवाह
रामभद्राचार्य ने कहा कि उनके खिलाफ या अन्य संतों के विरुद्ध कथित शिकायतों और एफआईआर से जुड़ी चर्चाएं पूरी तरह भ्रामक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संत परंपरा आपसी सम्मान और मर्यादा पर आधारित है तथा किसी भी संत के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने लोगों से अपील की कि अपुष्ट जानकारियों और अफवाहों पर भरोसा न करें।
आशुतोष ब्रह्मचारी पर साधा निशाना
रामभद्राचार्य ने आशुतोष ब्रह्मचारी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनके आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग व्यक्तिगत कारणों से संस्थान और उससे जुड़े लोगों को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस तरह की बातें धार्मिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हैं।
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विवाद के केंद्र में क्या है मामला
हाल के दिनों में आशुतोष ब्रह्मचारी ने कुछ वीडियो और बयानों के माध्यम से कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि कुछ शिकायतें दबाव में दर्ज कराई गईं और उनके पास इस संबंध में कुछ साक्ष्य मौजूद हैं। इन दावों के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया, हालांकि आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
जांच की मांग और संयम की अपील
रामभद्राचार्य ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने अपने अनुयायियों और आम लोगों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों का इंतजार करें। उन्होंने कहा कि सत्य सामने आने पर सभी भ्रम स्वतः समाप्त हो जाएंगे।