अयोध्या से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो साबित करती है कि हुनर कभी किसी पहचान का मोहताज नहीं होता. लखनऊ के सब्जी विक्रेता अनिल कुमार साहू ने जीवन के उस मोड़ पर एक क्रांतिकारी घड़ी बनाई है, जब अक्सर लोग रिटायरमेंट की सोचते हैं. हाईस्कूल तक पढ़े अनिल साहू ने 25 साल की मेहनत से एक ऐसी वर्ल्ड क्लॉक बनाई है जो भारत, टोक्यो, दुबई, बीजिंग, सिंगापुर और मॉस्को जैसे शहरों का समय एक ही सुई से बताती है.
रामलला को भेंट, श्रद्धा का प्रमाण
जब अयोध्या में पहली बार रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई, अनिल साहू ने अपनी बनाई अनोखी घड़ी भगवान को समर्पित की. अब जब राम दरबार की पुनः प्रतिष्ठा हो रही है, मंदिर ट्रस्ट ने इस घड़ी की फिर मांग की. ट्रस्ट कीमत अदा करने को तैयार था, लेकिन साहू ने इसे दोबारा श्रद्धापूर्वक भेंट किया.
पिता, संघर्ष और प्रेरणा
तीन बेटियों के पिता अनिल आज भी सब्ज़ी बेचते हैं, लेकिन उनका सपना है कि बेटियाँ पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें. आर्थिक तंगी के बावजूद उनका आत्मबल और तकनीकी जज़्बा आज देश-दुनिया में सराहा जा रहा है.
समय से आगे चलता जज़्बा
यह घड़ी सिर्फ समय नहीं बताती, बल्कि यह एक ऐसे इंसान की कहानी सुनाती है जिसने आस्था, मेहनत और जुनून को मिला कर वक्त को भी झुका दिया.