सरकार बनाम ब्रज किशोर सिंह मामले में सुनवाई पूरी हुई मुजफ्फरनगर। उत्तराखंड आंदोलनकारियों पर करीब इकतीस वर्ष पूर्व पुलिस की बर्बरता के दौरान की गई हथियारों की फर्जी बरामदगी के मामले सीबीआई बनाम ब्रज किशोर सिंह मामले में सुनवाई पूरी हो गई है। इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा नामित स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट में 15 मई को फैसला आएगा। पृथक राज्य की मांग को लेकर एक अक्टूबर 1994 की देर रात्रि दिल्ली में राजघाट के लिए जा रहे उत्तराखंड आंदोलनकारियों की मुजफ्फरनगर में रुड़की रोड पर रामपुर तिराहे के निकट आंदोलनकारियों से तीखी झड़प हुई थी। इस दौरान पुलिस की गोली से सात आंदोलनकारी शहीद हुए थे, जबकि 17 आंदोलनकारी घायल हुए थे। इसी दौरान महिला आंदोलनकारियों से दुष्कर्म के आरोप भी लगाए गए थे, वहीं आंदोलनकारियों द्वारा घटनास्थल पर छोड़े गए हथियार व अवैध शराब पुलिस द्वारा बरामद की गई थी।
फर्जी हथियार बरामदगी मामले सीबीआई बनाम ब्रज किशोर मामले में फैसले के लिए कोर्ट ने 15 मई की तिथि नियत की है
इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई द्वारा विवेचना करते हुए हथियारों की फर्जी बरामदगी किए जाने के मामले में हथियार बरामद करने वाले तत्कालीन थाना प्रभारी बृज किशोर सिंह व उनके हमराहा, तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रामपुर तिरहाया कांड से संबंधित सीबीआई के मामलों की सुनवाई मुजफ्फरनगर में ही हाई कोर्ट द्वारा नामित किए गए विशेष मजिस्ट्रेट और विशेष सैशन्स जज के कोर्ट में हो रही है। फर्जी हथियार बरामदगी मामले सीबीआई बनाम ब्रज किशोर मामले में फैसले के लिए कोर्ट ने 15 मई की तिथि नियत की है।
इस मामले में इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसकर्मी आरोपी है
मामले की सुनवाई हाई कोर्ट द्वारा नामित विशेष मजिस्ट्रेट एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में चल रही है। मामले में दोनों पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है। इस मामले में इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसकर्मी आरोपी है, जबकि एक पुलिसकर्मी की मौत हो चुकी है। उत्तराखंड संघर्ष समिति के वरिष्ठ अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने आंदोलनकारियों से फर्जी हथियार बरामदगी दिखाए जाने के मामले में सरकार बनाम ब्रजकिशोर मामले की सुनवाई एसीजेएम प्रथम के न्यायाधीश देवेन्द्र फौजदार की कोर्ट में चल रही है। सरकार बनाम ब्रजकिशोर मामले में थाना झिंझाना के तत्कालीन थाना प्रभारी ब्रजकिशोर, तत्कालीन कांस्टेबिल उमेश चंद और अनिल कुमार आरोपी हैं। आरोप था कि तत्कालीन थाना प्रभारी झिंझाना ब्रजकिशोर ने आंदोलनकारियों से फर्जी तरीके से अवैध हथियारों की बरामदगी दिखाई थी।
इस मामले में सीबीआई के लोक अभियोजक धारा सिंह मीणा ने बताया
अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने बताया कि विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में जिन हथियारों से गोली चलना दिखाया गया है, जांच में वह कारतूस किसी दूसरे हथियार से चलना साबित हुआ है। इस मामले में सीबीआई के लोक अभियोजक धारा सिंह मीणा ने बताया कि सीबीआई ने एफआईआर में बसों से हथियार मिलना दिखाया था जबकि चार्जशीट में आंदोलनकारियों से हथियार बरामद होना दिखाया गया था। एफएसएल रिपोर्ट में बरामद हथियारों से कारतूस चलने की पुष्टि नही हो सकी है। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने 15 मई को फैसले की तिथि नियत की है।