
हिंदू पंचांग के अनुसार, पितृपक्ष की अमावस्या तिथि को अत्यंत पावन माना गया है। इस दिन विशेष रूप से पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पूजा की जाती है, जिससे उनके आशीर्वाद से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस वर्ष पितृपक्ष अमावस्या पर एक दुर्लभ सूर्य ग्रहण का संयोग भी बन रहा है, जो इस दिन को और भी प्रभावशाली बना देता है। मान्यता है कि जब ग्रहण काल और पितृपक्ष अमावस्या एक साथ आते हैं, तो कुछ विशेष उपाय करने से न केवल पितरों की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि आर्थिक लाभ, कर्ज मुक्ति और घर में समृद्धि के द्वार भी खुलते हैं।
पितृपक्ष अमावस्या पर करें ये 4 चमत्कारी उपाय
तिल अर्पण और जल तर्पण करें:
सूर्य उदय से पहले किसी नदी, तालाब या घर में ही एक पात्र में जल, तिल, पुष्प और कुश डालकर पितरों के नाम का तर्पण करें। यह उपाय पितरों को तृप्त करता है और उनके आशीर्वाद से घर में दरिद्रता दूर होती है।
गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराएं:
ग्रहण समाप्ति के बाद सफाई कर शुद्ध होकर गरीबों या ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा दें। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है।
कालसर्प दोष और पितृ दोष निवारण के लिए दीपदान
शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। यह उपाय पितृ दोष और राहु-केतु से संबंधित ग्रह दोषों को शांत करता है।
काले तिल और गुड़ का दान करें:
काले तिल, गुड़, और कंबल का दान जरूरतमंदों को करें। यह न केवल ग्रह दोष शांत करता है बल्कि आर्थिक उन्नति में भी सहायक होता है।
विशेष ध्यान दें
ग्रहण के समय कोई भी शुभ कार्य न करें। स्नान, जप, ध्यान और मंत्रोच्चार ही करें। ग्रहण के बाद स्नान करके पवित्रता बनाए रखें।