उत्तर प्रदेश ATS ने हालिया धर्मांतरण रैकेट मामले में सर्च शुरू कर दिया है और जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा को पकड़ने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है. बलरामपुर में सक्रिय यह गिरोह कथित तौर पर गरीब और कमजोर वर्ग की लड़कियों को आर्थिक लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करता था. इसके लिए एक व्यवस्थित “रेट सिस्टम” भी तैयार किया गया था. जिसमें हर जाति की लड़कियों के लिए अलग वित्तीय प्रस्ताव दिए जाते थे. ATS ने उससे जुड़े ठिकानों की छानबीन की, जिसमें विदेशी फंडिंग की गड़बड़ियों का पता चला है और कई रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं. साथ ही दो मुख्य सहयोगियों को गिरफ्तार भी किया गया है, जबकि मास्टरमाइंड अबतक फरार है. घटनाक्रम ने पूरे राज्य में एक नई सनसनी फैला दी है और अब सीबीआई भी सभी गतिविधियों पर निगाहें लगाए हुए है.
कौन है जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा?
जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा, जो बलरामपुर के उतरौला तहसील में नागपुर-कनेक्टेड गौशाला की जमीन पर स्थित एक अस्पताल परियोजना से जुड़ा हुआ था. उसका गिरोह कथित तौर पर गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग की लड़कियों को आर्थिक मदद, नौकरी या जमीन का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए बाध्य कर रहा था. इसके पीछे एक संगठित रेट-सिस्टम था. जैसे - ब्राह्मण, सरदार, क्षत्रिय वर्ग की लड़कियों के लिए 15–16 लाख, अन्य पिछड़ी जातियों के लिए 10–12 लाख रुपए तक.
यूपी ATS की जांच और गिरफ्तारी
जून 2025 में लखनऊ में ‘घर वापसी’ करने वाले 15 पीड़ितों ने छांगुर बाबा की भूमिका के बारे में जानकारी दी, जिससे ATS ने बलरामपुर के मधुपुर और उतरौला में व्यापक छापेमारी शुरू की. जांच के दौरान उसके सहयोगी बेटा महबूब और जमालुद्दीन गिरफ्तार हुए, जबकि छांगुर बाबा अभी फरार है.
विदेशी फंडिंग से जुड़े दस्तावेज जब्त
ATS ने विदेशी फंडिंग से जुड़े दस्तावेज और धर्म परिवर्तन संबंधी रिकार्ड जब्त किए और यह संदेह जताया कि खाड़ी देशों से धन आता था. जिससे अनुसूचित जाति और गरीब परिवारों को टारगेट किया गया और विरोध करने पर फर्जी मुकदमे करवाए गए.
सीबीआई को भी जांच के आदेश
एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले पर सीबीआई से भी जांच कराने का आदेश दिया. सीबीआई ने उतरौला कोतवाली और राहेरा माफी गांव में छापेमारी की, स्थानीय लोगों के बयान लिए और छांगुर की संपत्तियों पर भी नजर रखी.
हर जाति की लड़की के अलग रेट
छांगुर बाबा का गिरोह जातिगत रेट सिस्टम पर काम करता था. उच्च जातियों की लड़कियों के लिए 15–16 लाख, पिछड़ी जाति की लड़कियों के लिए 10–12 लाख, और अन्य वर्ग की लड़कियों के लिए 8–10 लाख रुपए. यह खुलासा अत्यंत चौंकाने वाला था, जिसने धार्मिक और सामाजिक तल पर भारी संकट पैदा किया.
ATS की त्वरित कार्रवाई
जांच में मिले सबूतों के आधार पर ATS ने FIR दर्ज कर कई ठिकानों की पड़ताल की और छागुर बाबा के करीबियों को गिरफ्तार किया, जबकि खबर है कि वह अब लखनऊ में छिपा है.
यह मामला यूपी में धर्मांतरण रैकेट और धार्मिक ग़ैरकानूनी गतिविधियों की एक बड़ी और संवेदनशील घटना के रूप में सामने आया है. सरकारी एजेंसियां इस पर सख्त नजर बनाए हुए हैं, और अगली सुनवाई को लेकर निगाहें टिकी हुई हैं.