भारत और साउथ अफ्रीका के बीच ईडन गार्डन्स में खेले जा रहे पहले टेस्ट के दूसरे दिन रवींद्र जडेजा ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो दुनिया के सिर्फ तीन महान ऑलराउंडर्स ही अब तक कर पाए थे। जडेजा ने अपने टेस्ट करियर में 4000+ रन और 300+ विकेट का शानदार डबल पूरा कर इतिहास रच दिया। इंजरी और कठिन दौर से गुजरने के बावजूद लगातार दमदार प्रदर्शन ने उन्हें इस एलीट क्लब तक पहुंचाया। खास बात यह है कि जडेजा ने यह उपलब्धि पहली इनिंग में 10 रन पूरे करते ही हासिल कर ली और यह रिकॉर्ड हासिल करने वाले दुनिया के दूसरे सबसे तेज खिलाड़ी बन गए। उनसे तेज सिर्फ इंग्लैंड के इयान बॉथम रहे हैं, जिन्होंने यह माइलस्टोन 72 टेस्ट में पूरा किया था।
टेस्ट इतिहास के बड़े ऑलराउंडर
4000 रन 300 विकेट क्लब में शामिल खिलाड़ियों की बात करें तो सबसे पहले नाम आता है इयान बॉथम का, जिन्होंने 5200 रन और 383 विकेट अपने नाम किए। भारत के महान कपिल देव ने 5248 रन और 434 विकेट के साथ इस सूची में अपना स्थान बनाया। न्यूजीलैंड के डेनियल विटोरी ने 4531 रन और 362 विकेट झटके और अब इस लिस्ट में चौथे सदस्य के रूप में जुड़ गए हैं रवींद्र जडेजा। 88 टेस्ट मैचों में 4000+ रन और 338 विकेट के साथ जडेजा ने साबित कर दिया कि वो सिर्फ मौजूदा दौर ही नहीं बल्कि टेस्ट इतिहास के भी बड़े ऑलराउंडर्स में गिने जाएंगे।
टीम इंडिया के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी
इस टेस्ट मैच में केएल राहुल ने भी अपने 4000 रन पूरे किए, लेकिन जडेजा की उपलब्धि हर किसी पर भारी पड़ी। एक गेंदबाजी ऑलराउंडर के रूप में करियर शुरू करने वाले जडेजा ने अपने बैटिंग कौशल में जबरदस्त सुधार किया है। उनके नाम 6 टेस्ट शतक और 27 अर्धशतक दर्ज हैं, जो दिखाता है कि वह अब भरोसेमंद बल्लेबाज भी बन चुके हैं। मैदान के हर फॉर्मेट में उनका संतुलित प्रदर्शन उन्हें टीम इंडिया का सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाता है।
ICC टेस्ट रैंकिंग में नंबर 1 ऑलराउंडर
आज रवींद्र जडेजा सिर्फ एक ऑलराउंडर नहीं, बल्कि ICC टेस्ट रैंकिंग में नंबर 1 ऑलराउंडर के रूप में दुनिया में पहचाने जाते हैं। तेज गेंदबाजी, स्पिन और रफ़-सतह पर बैटिंग हर परिस्थितियों में उनकी निपुणता उन्हें और भी खास बनाती है। SENA देशों में उनकी सफल पारियां और मैच जिताऊ स्पेल यह साबित करते हैं कि जडेजा अब कपिल देव जैसी महान हस्तियों की श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। 4000 रन और 300 विकेट का यह डबल उनके करियर को टेस्ट इतिहास के स्वर्णाक्षरों में दर्ज कर देता है।