भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी को अब नया नेतृत्व मिल गया है। लंबे समय तक पाकिस्तान डेस्क संभालने वाले और ऑपरेशन सिंदूर जैसे मिशन में निर्णायक भूमिका निभा चुके पराग जैन को दो साल के लिए प्रमुख नियुक्त किया गया है। वे ऐसे समय में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं जब देश के सामने आतंकवाद और कूटनीतिक मोर्चे पर बड़ी चुनौतियां हैं
खुफिया दुनिया का अनुभवी नाम पराग जैन
1989 बैच के वरिष्ठ अधिकारी हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत उस दौर में की जब पंजाब आतंकवाद की गिरफ्त में था। भटिंडा, मानसा और होशियारपुर जैसे जिलों में उन्होंने ज़मीन पर रहकर सुरक्षा मोर्चे संभाले। बाद में वे कई अहम प्रशासनिक पदों पर रहे और खुफिया एजेंसी में भी उनकी नियुक्ति हुई
बालाकोट एयरस्ट्राइक और अनुच्छेद 370 की रणनीति के सूत्रधार
अपने खुफिया करियर के दौरान पराग जैन ने पाकिस्तान से जुड़ी रणनीतियों को बारीकी से समझा और सशक्त कार्रवाई में योगदान दिया। बालाकोट एयरस्ट्राइक और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में वे मुख्य रणनीतिक टीम का हिस्सा रहे।
ऑपरेशन सिंदूर से साबित की दक्षता
वर्तमान में उन्होंने एक विशेष खुफिया मिशन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की अगुवाई की, जिसमें पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी शिविरों की पहचान की गई। इस ऑपरेशन के ज़रिए खुफिया नेटवर्क की ताकत को फिर से साबित किया गया और तकनीकी व जमीनी सूचनाओं का तालमेल दिखाया गया।
वैश्विक मंचों पर भी मजबूत पकड़
पराग जैन ने विदेशों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है। कनाडा और श्रीलंका जैसे देशों में रहकर उन्होंने वैश्विक खुफिया नेटवर्क और कूटनीति को करीब से समझा। उनके ये अनुभव आने वाले समय में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
नई जिम्मेदारी, नई चुनौतियां
देश के सामने अब सीमा पार आतंकवाद, सिंधु जल समझौते की समीक्षा, और पड़ोसी देशों में उठती राजनीतिक उथल-पुथल जैसी चुनौतियां हैं। ऐसे समय में पराग जैन की रणनीतिक सोच और जमीनी पकड़ एजेंसी को नई दिशा दे सकती है। उम्मीद है कि वो तकनीकी खुफिया से आगे बढ़कर ज़मीनी नेटवर्क को और मजबूत बनाएंगे।