दुनिया के मशहूर निवेशक Ray Dalio का मानना है कि वैश्विक व्यवस्था अब एक बड़े मोड़ पर पहुंच चुकी है। निखिल कामथ के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि 1945 के बाद बनी वह दुनिया अब खत्म हो रही है, जो नियमों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर टिकी थी। संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं का असर पहले जैसा नहीं रहा। अब फैसले नियमों से नहीं, बल्कि ताकत से हो रहे हैं। डेलियो के मुताबिक, आज की दुनिया में आत्मनिर्भरता, तकनीक और घरेलू मजबूती सबसे अहम हो गई है। इसी बदले माहौल में भारत को वह एक खास मौके पर खड़ा देखते हैं।
युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, तकनीक से भी
डेलियो ने साफ कहा कि आज की लड़ाई सिर्फ बॉर्डर या हथियारों तक सीमित नहीं है। यह व्यापार, टेक्नोलॉजी, पूंजी और प्रभाव की जंग भी है। उन्होंने इसे ‘क्लासिक युद्ध से पहले की जंग’ बताया। अमेरिका और चीन के बीच यह टकराव सबसे ज्यादा दिखता है। डेलियो के अनुसार, तकनीक की लड़ाई सबसे अहम है, क्योंकि सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सिस्टम भविष्य की ताकत तय करेंगे। अमेरिका जहां एडवांस चिप टेक्नोलॉजी में आगे है, वहीं चीन तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने में मजबूत है। इस हालात ने हर देश को अपनी कमजोरियों और निर्भरता पर दोबारा सोचने को मजबूर कर दिया है।
क्यों भारत सबसे मजबूत दावेदार
इस अस्थिर वैश्विक माहौल के उलट डेलियो भारत को ‘शानदार ग्रोथ कर्व’ पर बताते हैं। Bridgewater Associates के संस्थापक का कहना है कि भारत के पास कम कर्ज, बड़ी युवा आबादी और तेजी से बनता इंफ्रास्ट्रक्चर है। यही कॉम्बिनेशन उसे बाकी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से अलग बनाता है। जहां कई विकसित देश भारी कर्ज में डूबे हैं, वहीं भारत के पास अभी क्रेडिट बढ़ाने, डिजिटल और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की पूरी गुंजाइश है। डेलियो ने भारत की मौजूदा स्थिति की तुलना करीब 30 साल पहले के चीन से की, जब वहां तेजी से बदलाव शुरू हुआ था और विकास की रफ्तार पूरी तरह उसके पक्ष में थी।
नई पीढ़ी के निवेशकों के लिए संदेश
डेलियो के मुताबिक, आने वाले समय में किसी भी देश की असली ताकत उसकी घरेलू सेहत होगी। मजबूत फाइनेंस, सामाजिक संतुलन और तकनीकी क्षमता ही आगे ले जाएगी। बातचीत के दौरान ‘WTF is Finance’ पॉडकास्ट में Nikhil Kamath के साथ उन्होंने युवा निवेशकों को सीधी सलाह दी। उनका कहना था कि जल्दी शुरुआत करें, वही काम चुनें जिससे लगाव हो और सीखते-सीखते आगे बढ़ें। डेलियो का निष्कर्ष साफ है—जैसे-जैसे दुनिया सतर्क प्रतिस्पर्धा की ओर बढ़ रही है, भारत के पास अगले 10 साल में सबसे तेज और मजबूत विकास दिखाने का दुर्लभ मौका है।