भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच रुपये को स्थिर बनाए रखने के लिए 100 अरब डॉलर से अधिक की फॉरवर्ड पोजीशन तैयार की है। इस रणनीति का उद्देश्य डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना बाजार में संतुलन बनाए रखना है। विदेशी निवेश में सुधार और अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने के बीच केंद्रीय बैंक अब इस रणनीति को चरणबद्ध तरीके से संतुलित कर रहा है।
क्या है RBI की 100 अरब डॉलर वाली रणनीति?
RBI ने रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए ‘शॉर्ट डॉलर फॉरवर्ड पोजीशन’ का सहारा लिया है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक भविष्य की एक तय तारीख पर डॉलर बेचने और रुपये खरीदने का समझौता करता है। इससे तत्काल विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती और बाजार में डॉलर की उपलब्धता तथा रुपये की स्थिरता दोनों बनी रहती हैं। ब्लूमबर्ग के अनुसार मई तक RBI की यह फॉरवर्ड बुक 106.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी।
वैश्विक संकट में बना मजबूत सुरक्षा कवच
अमेरिकी टैरिफ, पश्चिम एशिया में संघर्ष और वैश्विक वित्तीय अस्थिरता के दौरान RBI की यही रणनीति रुपये के लिए सुरक्षा कवच साबित हुई। हालात सुधरने और विदेशी निवेश बढ़ने के बाद केंद्रीय बैंक धीरे-धीरे अपनी फॉरवर्ड पोजीशन कम कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जून के मध्य से अब तक RBI लगभग 10 से 15 अरब डॉलर के सौदों का सफलतापूर्वक निपटारा कर चुका है, जबकि पिछले पखवाड़े में करीब 20 अरब डॉलर की मैच्योरिटी भी बिना किसी बड़े बाजार झटके के संभाली गई।
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अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस रणनीति से रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव की संभावना कम होती है, जिससे आयात लागत नियंत्रित रहती है और विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है। कच्चे तेल जैसी जरूरी वस्तुओं के आयात पर दबाव कम होने से महंगाई को नियंत्रित रखने में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहने से भविष्य के वैश्विक संकटों का सामना करना भी आसान होगा।
आगे की चुनौतियों के लिए भी तैयारी
RBI ने स्पष्ट किया है कि उसके पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और आवश्यक बफर मौजूद हैं। साथ ही, प्रवासी भारतीयों (NRI) की विदेशी मुद्रा जमा को बढ़ावा देने के लिए बैंकों की हेजिंग लागत वहन करने जैसी पहल भी की गई है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती के बावजूद RBI की रणनीति रुपये को स्थिर रखने और भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।