भारतीय रिजर्व बैंक ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों यानी NBFC पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 135 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। RBI ने एक प्रेस रिलीज जारी कर इसकी जानकारी दी। यह फैसला उन कंपनियों के खिलाफ लिया गया है जो तय नियमों और वित्तीय मानकों का सही तरीके से पालन नहीं कर रही थीं। इस कार्रवाई के बाद वित्तीय क्षेत्र में काफी चर्चा शुरू हो गई है।
क्या होती हैं NBFC कंपनियां?
NBFC ऐसी वित्तीय कंपनियां होती हैं जो लोगों को लोन देने, निवेश सेवाएं देने और कई तरह की वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। हालांकि ये बैंक नहीं होतीं, लेकिन इनका काम काफी हद तक बैंकों जैसा होता है। इन कंपनियों की निगरानी और नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी RBI की होती है। अगर कोई कंपनी नियमों का पालन नहीं करती तो RBI उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।
कई बड़ी कंपनियां भी आईं चपेट में
जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उनमें एक्सप्रेस फिनकैप हाउस, अक्षय फिस्कल सर्विसेज, टाइम्स फाइनेंस, जुपिटर फिनवेस्ट, एसेल फाइनेंस बिजनेस लोन्स और सिटीवाइड फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी कई कंपनियां शामिल हैं। RBI ने रिजर्व बैंक एक्ट 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत यह कदम उठाया है। अब ये कंपनियां किसी भी तरह का नया लोन नहीं दे सकेंगी और न ही वित्तीय कारोबार कर पाएंगी।
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पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा असर
RBI की कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला है। जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उनमें बड़ी संख्या पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड थी। इसके अलावा 13 कंपनियों ने कार्रवाई से पहले ही अपने लाइसेंस RBI को वापस सौंप दिए। इन कंपनियों ने वित्तीय कारोबार छोड़ने का फैसला किया और खुद ही अपना पंजीकरण सरेंडर कर दिया।
अब नहीं कर सकेंगी वित्तीय कारोबार
RBI ने साफ किया है कि जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द या सरेंडर हुए हैं, वे अब जनता से पैसा जमा नहीं कर सकतीं। साथ ही वे किसी तरह का नया लोन या अन्य वित्तीय सेवा भी नहीं दे पाएंगी। RBI का कहना है कि वित्तीय व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं। इससे ग्राहकों के हितों की भी सुरक्षा होती है।
पहले भी हुई थी बड़ी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब RBI ने इतनी बड़ी कार्रवाई की हो। इससे पहले मई 2026 में भी केंद्रीय बैंक ने 150 NBFC के लाइसेंस रद्द किए थे। उस समय भी सबसे ज्यादा कंपनियां पश्चिम बंगाल और दिल्ली की थीं। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से साफ है कि RBI नियमों को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहता। जो कंपनियां तय मानकों का पालन नहीं करेंगी, उनके खिलाफ आगे भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।