भारतीय रिजर्व बैंक को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि केंद्रीय बैंक ने मई के दौरान करीब 12 अरब डॉलर यानी लगभग 1.14 लाख करोड़ रुपये मूल्य का सोना बेचा है। रिपोर्ट के अनुसार यह कदम मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और उसके भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को देखते हुए उठाया गया। हालांकि इस मामले में अभी तक रिजर्व बैंक की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसी वजह से आर्थिक जगत में इस दावे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सोना बेचने की बात क्यों उठी?
रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ने के बावजूद रिजर्व बैंक के गोल्ड रिजर्व के मूल्य में कमी दर्ज की गई। सामान्य परिस्थितियों में सोने और विदेशी मुद्रा भंडार का मूल्य बढ़ना चाहिए था। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इसी आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि केंद्रीय बैंक ने अपने भंडार का कुछ हिस्सा बेचा होगा। हालांकि वास्तविक स्थिति क्या है, इसका स्पष्ट जवाब सिर्फ आधिकारिक जानकारी से ही मिल सकता है।
तीन बड़ी वजहों की चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक पहली वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से तेल महंगा हो रहा है और भारत जैसे बड़े आयातक देश पर इसका असर पड़ रहा है। दूसरी वजह रुपये पर बढ़ता दबाव बताया गया है। विदेशी भुगतान बढ़ने से घरेलू मुद्रा कमजोर हो सकती है। तीसरी वजह बाजार में पर्याप्त विदेशी मुद्रा बनाए रखना है, ताकि जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक तेजी से हस्तक्षेप कर सके।
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रुपये को संभालने की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में केंद्रीय बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती रुपये को स्थिर बनाए रखना होती है। अगर विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत रहता है तो बाजार में भरोसा बना रहता है। इसी कारण केंद्रीय बैंक डॉलर जैसे अधिक आसानी से इस्तेमाल होने वाले संसाधनों को प्राथमिकता दे सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रुपये को मजबूत रखने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
देश में बढ़ रहा गोल्ड रिजर्व
मार्च 2026 तक रिजर्व बैंक के पास 880.52 मीट्रिक टन सोना था। रिपोर्ट के अनुसार इसका बड़ा हिस्सा अब भारत की तिजोरियों में रखा जा रहा है। कुछ साल पहले की तुलना में देश के भीतर रखे जाने वाले सोने की मात्रा बढ़ी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने सोने को वापस घरेलू भंडार में रखने की रणनीति अपना रहे हैं। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि रिजर्व बैंक इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है या नहीं।