
RBI MPC meeting decision: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक का आज अंतिम दिन था। बुधवार को गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की कि नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यानी रेपो रेट 5.50% पर ही स्थिर रहेगा। यह फैसला 29 सितंबर से चली आ रही बैठक के समापन पर लिया गया। इससे यह साफ है कि उपभोक्ताओं को सस्ते कर्ज का इंतजार अभी और करना होगा। गवर्नर ने कहा कि घरेलू मोर्चे पर बीते कुछ महीनों में कई अहम बदलाव हुए हैं, जिनका असर आने वाले समय में अर्थव्यवस्था पर साफ दिखेगा।
महंगाई पर नियंत्रण की दिशा में सुधार
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई के मोर्चे पर हालात पहले की तुलना में बेहतर हुए हैं। जून में खुदरा मुद्रास्फीति 3.7% थी, जो अगस्त में घटकर 3.1% और हाल ही में और कम होकर 2.6% पर पहुंच गई है। इस गिरावट की मुख्य वजह खाद्य मुद्रास्फीति में कमी और जीएसटी में की गई कटौती है। उन्होंने बताया कि जीएसटी सुधारों के चलते अगस्त में महंगाई का स्तर अनुमान से भी कम रहा। इसके अलावा विदेशी निवेश (एफडीआई) में मजबूती आई है, जिसके चलते जुलाई में शुद्ध एफडीआई प्रवाह 38 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा।
यह भी देखेंःAccident In Muzaffarnagar: मुजफ्फरनगर में भीषण सड़क हादसा, अस्थि विसर्जन के लिए जा रहे 6 श्रद्धालुओं की मौत
जीडीपी ग्रोथ को लेकर बेहतर अनुमान
बैठक में गवर्नर ने जीडीपी ग्रोथ का संशोधित अनुमान भी जारी किया। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि को पहले के 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया गया है। यह संशोधन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति और अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश, मांग और स्थिर महंगाई का माहौल आने वाले समय में ग्रोथ को और मजबूती देगा। वहीं, रेपो रेट स्थिर रखने का निर्णय मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।