Bajaj Finance Share Fall : भारतीय रिजर्व बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी NBFCs के लिए कर्ज देने के तरीके में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत NBFCs को मुख्य रूप से ऐसे टर्म लोन देने की अनुमति होगी, जिनकी तय भुगतान अवधि और किस्तों का स्पष्ट कार्यक्रम हो। बार-बार इस्तेमाल किए जा सकने वाले रिवॉल्विंग क्रेडिट उत्पादों पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
फ्लेक्सी लोन पर पड़ेगा सबसे बड़ा असर
इस प्रस्ताव का असर खासतौर पर फ्लेक्सी-लोन जैसे उत्पादों पर पड़ सकता है। इनमें ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार रकम निकालकर चुकाने के बाद दोबारा उसी क्रेडिट सीमा का इस्तेमाल कर सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था में चुकाई गई राशि के बाद क्रेडिट सीमा को दोबारा बहाल नहीं किया जा सकेगा।
Bajaj Finance के शेयरों में क्यों आई गिरावट
RBI के प्रस्ताव की खबर सामने आते ही निवेशकों में चिंता बढ़ गई। 7 अगस्त को Bajaj Finance के शेयर करीब 5.5 फीसदी तक टूटकर 1,086 रुपये के आसपास पहुंच गए। इस गिरावट से कंपनी के बाजार पूंजीकरण में करीब 33,500 करोड़ रुपये की कमी आई। Tata Capital और L&T Finance समेत कुछ अन्य NBFC शेयर भी दबाव में रहे।
कंपनी के कारोबार पर क्या होगा असर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अगर नियम मौजूदा प्रस्ताव के रूप में लागू होते हैं तो फ्लेक्सी-क्रेडिट पर निर्भर NBFCs की कर्ज वृद्धि और शुल्क आय प्रभावित हो सकती है। Bajaj Finance का फ्लेक्सी-लोन कारोबार काफी बड़ा माना जाता है, इसलिए निवेशकों ने कंपनी की भविष्य की वृद्धि को लेकर चिंता जताई है। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कंपनियां नए उत्पादों के जरिए इसका असर कम कर सकती हैं।
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ग्राहकों और निवेशकों को क्या समझना चाहिए
फिलहाल यह अंतिम नियम नहीं है। RBI ने प्रस्ताव पर लोगों और संबंधित पक्षों से 28 अगस्त तक सुझाव मांगे हैं। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मौजूदा फ्लेक्सी-लोन पूरी तरह बंद हो जाएंगे। प्रस्ताव का उद्देश्य कर्ज व्यवस्था में जोखिम कम करना और ऐसी स्थिति रोकना है जिसमें पुराने कर्ज की अदायगी नए कर्ज से होती रहे।